विवेकानंद बस्ती का हिंदू सम्मेलन सूर्य विजय अखाड़ा परिसर में रविवार को हुआ। धर्म के लिए जिये समाज के लिए जिये गीत के ओजपूर्ण बोलो से सारा परिसर गूंज गया। लोक संगीत तमूरा भजन की प्रस्तुति से सभी को बुंदेलखंड की संस्कृति से जोड़ा गया। मुख्य वक्ता अंशुल भार्गव ने कहा कि हिंदू मतलब सब […]
विवेकानंद बस्ती का हिंदू सम्मेलन सूर्य विजय अखाड़ा परिसर में रविवार को हुआ। धर्म के लिए जिये समाज के लिए जिये गीत के ओजपूर्ण बोलो से सारा परिसर गूंज गया। लोक संगीत तमूरा भजन की प्रस्तुति से सभी को बुंदेलखंड की संस्कृति से जोड़ा गया। मुख्य वक्ता अंशुल भार्गव ने कहा कि हिंदू मतलब सब को धारण करने वाला। हम हिंदू वो हैं जो सब की मंगल कामना करते हैं। हिंदू धर्म प्रेम करुणा के साथ जीवन जीना सिखाता है। हिंदू कोई मत पंत नहीं है। विशेष मान्यताओं के साथ जो युक्त हैं वो हिंदू हैं पराए धन को हम मिट्टी और धरती माता को हम जननी मानते हैं। श्रीराम ने सोने की लंका छोड़कर अपनी मातृभूमि को महत्व दिया, यही हिंदुत्व है। वे 14 वर्ष वनवास में अपनी मातृ भूमि की मिट्टी साथ रख कर पूजन करते थे। पं. यशोवर्धन चौबे ने कहा कि समरसता समाज के लिए वह कार्य है जो आने वाली कई पीढिय़ों को पोषित करने वाला है। उन्होंने समरसता का अर्थ समझाते हुए कहा की हम सभी एक ऐसे देश के वासी हैं जहां भिन्नता में एकता का वाक्य स्वयं सिद्ध होता है। पूर्व महापौर मनोरमा गौर ने कहा की सारे भारत में हिन्दू सम्मेलन का आयोजन स्वदेशी अपनाने, नागरिक कर्तव्य, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के साथ हिन्दू जागरण के लिए किया जा रहा है।