सागर

जिम्मेदारी से बचने रेलवे का नया तरीका! सड़क भी बनाई, अब बोर्ड लगाकर कहा-पुलिया वाहनों के लिए नहीं

ओवरब्रिज निर्माण में देरी से लोग अंडरब्रिज के रास्ते से गुजरने को मजबूर, अनहोनी की आशंका के बीच रेलवे ने झाड़ा पल्ला, दुर्घटना हुई तो वाहन चालक ही होंगे जिम्मेदार
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Jul 20, 2026
Railways' new tactic to evade responsibility! They built a road, then put up a sign stating the culvert is not for vehicles
अंडरब्रिज पर रेलवे ने खिली सूचना। फोटो-पत्रिका

बीना. खिमलासा रोड स्थित रेलवे गेट पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज की धीमी गति का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। आवागमन की परेशानी के बीच रेलवे ने पुलिया के पास बोर्ड लगाकर स्पष्ट कर दिया है कि यह पुलिया केवल पानी निकासी के लिए है, आवागमन के लिए प्रतिबंधित है। हैरानी की बात यह है कि इसी पुलिया से निकलने के लिए रेलवे सडक़ का निर्माण करा चुकी है। ऐसे में लोगों का आरोप है कि रेलवे सुविधा देने के बजाय केवल भविष्य की जिम्मेदारी से बचने की तैयारी कर रहा है।
दरअसल खिमलासा रोड स्थित रेलवे गेट पर ओवरब्रिज का निर्माण लंबे समय से जारी है, लेकिन काम में हो रही देरी के कारण शहरवासियों को आज भी वैकल्पिक मार्ग के रूप में अंडरब्रिज और पुलिया के रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। लोगों की लगातार मांग के बाद रेलवे ने पुलिया तक पहुंचने के लिए सड़क का निर्माण कराया था, जिससे आवागमन कुछ हद तक आसान हो सके। अब उसी स्थान पर रेलवे ने एक बोर्ड लगाकर लिखा है कि यह पुलिया केवल पानी की निकासी के लिए बनाई गई है व वाहनों के लिए प्रतिबंधित है, इससे लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि यह रास्ता वाहनों के लिए सुरक्षित नहीं था, तो फिर रेलवे ने यहां सडक़ बनाकर लोगों को इस रास्ते का उपयोग करने के लिए क्यों प्रेरित किया।
मुकुल गोस्वामी ने कहा कि रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण समय पर पूरा नहीं कर पा रही है और अब किसी संभावित दुर्घटना की स्थिति में अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए बोर्ड लगाकर पल्ला झाड़ रही है। बारिश के मौसम में इस पुलिया से गुजरना और भी जोखिम भरा हो जाता है, लेकिन मजबूरी में लोग इसी रास्ते का उपयोग कर रहे हैं।

यह रास्ता जोड़ता है सीधे नेशनल हाईवे के लिए
यह मार्ग शहर को सीधे कन्याकुमारी-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ता है। वहीं, दूसरी ओर तहसील, न्यायालय, एसडीएम कार्यालय, एसडीओपी कार्यालय, स्कूल सहित कई महत्वपूर्ण शासकीय संस्थान स्थित हैं, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों का आना-जाना रहता है। लोगों का कहना है कि यदि रेलवे समय से ओवरब्रिज का निर्माण पूरा कर देती, तो न उन्हें जोखिम उठाना पड़ता और न ही इस तरह जिम्मेदारी से बचने रेलवे को बोर्ड लगाने की नौबत आती।

Updated on:
20 Jul 2026 12:27 pm
Published on:
20 Jul 2026 12:27 pm