
Satna news: मध्यप्रदेश में विद्युत वितरण कंपनियां निजी उपभोक्ताओं पर बिल जमा करने के लिए भले पूरी ताकत लगा देती हैं और कई मामलों में उपभोक्ताओं को जेल तक भी जाना पड़ता है। लेकिन सरकारी विभागों की बकाया वसूली में चुप्पी साध कर बैठ जाती है। जबकि इनका बिल करोड़ों में है और इनकी वजह से विद्युत उत्पादकों और कोयला कंपनियो को समय पर भुगतान नहीं हो पाता है। मध्यप्रदेश में अकेले जनजातीय कार्य विभाग (आदिम जाति कल्याण विभाग) पर 40 करोड़ की भारी भरकम राशि बकाया है लेकिन इस बारे में कोई भी जिम्मेदार बात नहीं करना चाहते हैं।
सतना जिले में इस विभाग पर बिजली बिल का 11 लाख रुपए का बकाया है। अब कंपनी के दबाव के बाद आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग ने जिला संयोजकों को बकाया बिल जमा करवाने के निर्देश दिए हैं। विद्युत वितरण कंपनियों के प्रबंध संचालकों ने ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और जनजातीय कार्य विभाग के आयुक्त को पत्र लिख कर उनके विभाग के बकाया बिलों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है। बताया है कि विभाग के छात्रावासों, आश्रमों, शैक्षणिक संस्थाओं और कार्यालयों का लंबे समय से बिल का बकाया लंबित है। लगातार पत्राचार के बाद भी विद्युत उत्पादकों और कोयला कंपनियों को भुगतान करने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में राज्य की विद्युत कंपनियों की वाणिज्यिक साध्यता प्रभावित हो रही है। जिसका असर व्यवस्था पर पड़ सकता है।
जनजातीय कार्य विभाग पर पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का 9618 कनेक्शनों पर 11.19 करोड़, मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का 2845 कनेक्शनों पर 8.55 करोड़ और पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी का 11580 कनेक्शनों पर 20.35 करोड़ रुपए बकाया है। इस तरह प्रदेश में जनजातीय विभाग को बिजली कंपनी को कुल 40.10 करोड़ रुपए बिजली बिल का बकाया जमा करना है।
रीवा संभाग की स्थिति देखें तो सतना जिले में आजाक के 54 कनेक्शनों पर 11 लाख, रीवा जिले में 83 कनेक्शनों पर 33 लाख, सीधी जिले के 103 कनेक्शनों पर 72 लाख और सिंगरौली जिले के 118 कनेक्शनों पर 65 लाख का बिल भुगतान बकाया है।