International Yoga Day: मनाया जाता है 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस योग अब पहाड़ों से लेकर थार के रेतीले टीलों तक पहुंच चुका है वैज्ञानिकों ने शोध के बाद कुछ महत्वपूर्ण आसनों की पहचान की
नई दिल्ली। अब तक हम योग को धार्मिक spritualदृष्टि से देखते आएं हैं। लेकिन इस क्रिया का हमारे शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। वैज्ञानिकscientist इस असमंजस में हैं कि आखिर किसी यौगिक क्रियाओं से कैसे शरीर में भौतिक बदलाव आतें हैं। वैज्ञानिक इस बात को जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर योग yoge के पीछे का विज्ञान क्या है, इंसानी शरीर और बायोकेमिस्ट्री योग के प्रति कैसे रिएक्ट करती हैं?
21 जून को हर साल अंतरराष्ट्रीय योग दिवसInternational Yoga Day के रूप में मनाया जा रहा है। जिसमें बच्चे से लेकर बुजुर्ग, हर कोई शामिल हो रहा है। योग सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर थार के रेतीले टीलों तक हर जगह पहुंच गया है। यहां तक कि सेनाArmy भी इसे करने लगी है। लोग योग से बेहतर महसूस करने लगे हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक इस पर गहन अध्ययन कर रहे हैं।
शोध भी साबित करते है योग का लाभ
डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेज के वैज्ञानिक ने शोध के बाद उन आसनों की पहचान की, जिसकी मदद से बर्फीली चेटियों के माहौल का सामना किया जा सके। इसके लिए रक्षा विशेषज्ञों ने खास तरह के प्राणायामों का एक क्रम तय किया है। जिससे बर्फीले क्षेत्रों में सैनिकों के फेफड़े की क्षमता में बढ़ोतरी हो सके ।
रेगिस्तान में भी किया जा सकता है योग
इसके अलावा योग के कुछ चुने हुए आसनों की मदद से थार रेगिस्तान में खुद को वहां के माहौल के मुताबिक ढालने में भी आसानी होती है। वैज्ञानिकों की टीम जवानों के बायोकेमिकल मापदंडों की जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंची कि सही तरीके से योग करने पर खून में फायदेमंद हार्मोंस का स्तर भी बढ़ जाता है।
डॉक्टर्स की मानें तो
योग को मैडीकल साइंस medical science ने भी स्वास्थ्यhealthy के लिए वरदान माना है। योग की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता शरीर और मन को आपस में जोड़ना है। योग सभी तरह के रोगों से लड़ने में मदद करता है। योग तनाव tension से मुक्ति पाने का सशक्त माध्यम है।
योग को रोज करने से रक्तचाप blood circulation और मधुमेहdiabetes जैसी बीमारियों को सहजता से नियंत्रित किया जा सकता है। केजीएम यूनिवर्सिटी लखनऊ के डॉ. सूर्यकांत कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने सन 1947 में स्वास्थ्य को इस प्रकार परिभाषित किया था,'दैहिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से पूर्णत: स्वस्थ होना ही स्वास्थ्य है।"
योग ही निरोग का साधन
केजीएम यूनिवर्सिटी और लखनऊ विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार- यदि प्रतिदिन 30 मिनट योग किया जाए, तो अस्थमा के मरीजों के जीवन स्तर में सुधार आता है।