
OpenAI and Anthropic
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) ने धर्मगुरुओं से नैतिकता का पाठ सीखना शुरू कर दिया है। हाल ही में एआई कंपनियों- एंथ्रोपिक और ओपनएआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने न्यूयॉर्क में कई धार्मिक नेताओं से मुलाकात की। इसका उद्देश्य यह समझना था कि एआई सिस्टम में नैतिकता और मानवीय मूल्य कैसे शामिल किए जाएं। इस बैठक में हिंदू टेंपल सोसाइटी ऑफ नॉर्थ अमेरिका, सिख कोएलिशन, बहाई इंटरनेशनल कम्युनिटी, ग्रीक ऑर्थोडॉक्स आर्चडायसी और चर्च ऑफ जीसस क्राइस्ट ऑफ लैटर-डे सेंट्स जैसे कई धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
एआई कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की धर्मगुरुओं के साथ चर्चा का मुख्य विषय यह था कि भविष्य में जब एआई और ज़्यादा शक्तिशाली होगा तब उसमें सही और गलत का संतुलन कैसे बनाया जाए। एक्सपर्ट्स के अनुसार एआई खुद नैतिकता को समझने में सक्षम नहीं होता, इसलिए उसे ऐसे डेटा और दिशा-निर्देशों पर प्रशिक्षित करना पड़ता है जो मानवीय मूल्यों को दर्शाते हों। इसी विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।
गूगल-फेसबुक के साथ काम कर चुकी अधिकारी जोआना शील्ड्स कहती है कि एआई कंपनियाँ तकनीक की ताकत और उसके प्रभाव को अच्छी तरह समझती हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य एआई सिस्टम्स के लिए नैतिक सिद्धांतों और आचार मानकों का एक साझा ढांचा तैयार करना है। इसमें सिर्फ तकनीकी विशेषज्ञ ही नहीं बल्कि अलग-अलग धर्मों और समुदायों की राय भी शामिल की जा रही है।
अब कई बड़ी एआई कंपनियाँ सिर्फ इंजीनियर और वैज्ञानिक ही नहीं बल्कि दार्शनिकों और नैतिक विशेषज्ञों को भी नियुक्त कर रही हैं जिससे एआई मानवीय मूल्यों के अनुरूप बनाया जा सके। इससे पहले भी एंथ्रोपिक ने सैन फ्रांसिस्को में कुछ ईसाई नेताओं के साथ एआई चैटबॉट क्लॉड के नैतिक व्यवहार पर चर्चा की थी। कंपनी ने क्लॉड कॉन्स्टिट्यूशन नाम का एक अलग 'संविधान' भी तैयार किया है, जिसमें ज़िम्मेदार व्यक्ति के जैसे निर्णय लेने के निर्देश लिखे गए थे।
Updated on:
12 May 2026 07:02 am
Published on:
12 May 2026 06:59 am
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