जिले की कई जगह सर्टिफिकेट का फर्जीवाड़ा बड़े स्तर पर चल रहा है। हालात यह हैं कि बिना वाहन की जांच किए सिर्फ फोटो और ऑनलाइन भुगतान के आधार पर 5 मिनट के भीतर पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जा रहा है।
सिवनी. जिले में प्रदूषण सर्टिफिकेट को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। गाड़ी के बिना अधिकृत केन्द्र में गए और फिजिकल जांच हुए बिना ही पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किया जा रहा है। जबकि जिले में एक ओर प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नियमों पर सख्त रवैये का दावा करता है। वहीं दूसरी ओर कई लोग नियमों को खुलेआम ठेंगा दिखा रहे हैं। पाल्यूशन अंडर कंट्रोल(पीयूसी सर्टिफिकेट) जो वाहनों के प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने का अहम दस्तावेज माना जाता है, जिले में अब सिर्फ एक दिखावा बनकर रह गया है। जिले की कई जगह सर्टिफिकेट का फर्जीवाड़ा बड़े स्तर पर चल रहा है। हालात यह हैं कि बिना वाहन की जांच किए सिर्फ फोटो और ऑनलाइन भुगतान के आधार पर 5 मिनट के भीतर पीयूसी सर्टिफिकेट जारी कर दिया जा रहा है। इतना ही नहीं पढ़े लिख लोग सिर्फ व्यस्तता के चलते इस फर्जीवाड़े का हिस्सा भी बन रहे हैं। जबकि यह आने वाले समय में बड़ा खतरा पैदा कर सकते हैं। बड़ी बात यह है कि जब यातायात पुलिस वाहनों की जांच करती है तो वह कागजात देखती है। पीयूसी सर्टिफिकेट सहित अन्य दस्तावेज होने पर वाहन स्वामी को बिना चालान काटे छोड़ दिया जाता है। जबकि पीयूसी सर्टिफिकेट ही बिना जांच के बनाया जा रहा है। ऐसे में जिले में प्रदूषण भी दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
जिले में ढाई लाख से अधिक वाहन
जिले में 2 लाख 90 हजार रजिस्टर्ड वाहन हैं। यह आंकड़े फरवरी 2026 तक के हैं। जबकि पिछले साल 25 हजार नए वाहन सडक़ों पर उतरे हैं। सिवनी जिले में 10 रजिस्टर्ड पीयूसी सेंटर हैं।
पीयूसी सर्टिफिकेट अनिवार्य
भारत में मोटर वाहन अधिनियम, 1989 के तहत सभी चालू वाहनों के लिए पीयूसी सर्टिफिकेट अनिवार्य है। यह दस्तावेज प्रमाणित करता है कि वाहन से निकलने वाला धुआं निर्धारित उत्सर्जन मानकों के अनुरूप है। इसके बिना गाड़ी चलाना या इंश्योरेंस रिन्यू कराना कानूनी अपराध है। इसमें सभी दोपहिया, तिपहिया और चार पहिया वाहनों(पेट्रोल, डीजल, सीएनजी) के लिए जरूरी है। वहीं इलेक्ट्रिक वाहनों को पीयूसी की आवश्यकता नहीं होती है।
फोन पर ही फोटो भेजा और पांच मिनट में तैयार
‘पत्रिका’ टीम ने नागपुर रोड पर एक पीयूसी सर्टिफिकेट बनाने वाले सेंटर के नंबर पर फोन किया। जिसमें बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। सेंटर संचालक से जब रिपोर्टर ने कहा कि वह गाड़ी लेकर आ नहीं सकता है। काफी दूर है और सर्टिफिकेट जरूरी है। इस पर संचालक ने कहा कि कोई बात नहीं आप वाट्सएप पर गाड़ी के नंबर प्लेट की फोटो भेज दीजिए और ओटीपी बता दीजिएगा और साथ में ऑनलाइन पेमेंट कर दिजिए। चार पहिया का पीयूसी प्रमाण पत्र 250 रूपए में छह माह एवं 500 रुपए में एक वर्ष के लिए बन जाएगा। महज पांच मिनट में सर्टिफिकेट वाट्सएप पर संचालक ने भेज दिया।
सडक़ों पर धुआं उड़ाते वाहनों की भरमार
जिले के सडक़ों पर कई वाहनों से उड़ते धुएं हवा में जहर घोल रहे हैं। पीयूसी जांच सही से न होने से वाहन तय मापदंड से ज्यादा प्रदूषण फैला रहे हैं।
कबाड़ सा वाहन खड़ी कर हो रहा प्रचार
जिले में 10 रजिस्टर्ड पीयूसी सेंटर संचालित हो रहा है। बड़ी बात यह है कि इन सेंटर के संचालक प्रचार कबाड़ की तरह खड़े वाहनों के माध्यम से कर रहे हैं। इन वाहनों के पास बैठे अधिकृत व्यक्ति महज वाहन नंबर के जरिए सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं।
इनका कहना है।
नियम के अनुसार ही वाहनों के जांच के बाद पीयूसी सर्टिफिकेट जारी किया जा सकता है। अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो यह नियम के खिलाफ है। ऐसे पीयूसी सेंटर पर जांच के बाद कार्यवाही की जाएगी।
देवेश बाथम, एआरटीओ, सिवनी