सिवनी. राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय(आरएसएस) को छिंदवाड़ा में खुले हुए छह साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक विश्वविद्यालय का अपना भवन नहीं बन पाया है। ऐसे में विश्वविद्यालय से संबद्ध सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा एवं पांढुर्ना जिले के विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। दरअसल विश्वविद्यालय के पास अपना भवन बन जाने […]
सिवनी. राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय(आरएसएस) को छिंदवाड़ा में खुले हुए छह साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक विश्वविद्यालय का अपना भवन नहीं बन पाया है। ऐसे में विश्वविद्यालय से संबद्ध सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा एवं पांढुर्ना जिले के विद्यार्थियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। दरअसल विश्वविद्यालय के पास अपना भवन बन जाने से विद्यार्थियों को नवीनतम पाठ्यक्रम की सुविधा भी मिल जाती। विश्वविद्यालय अधिक से अधिक विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में संभावनाएं तलाश करता और सुविधाएं उपलब्ध कराता, लेकिन शासन की उदासिनता की वजह से अब तक विश्वविद्यालय को भवन के लिए स्वीकृत बजट ही जारी नहीं किया गया है।
486.45 करोड़ रुपए हुए थे स्वीकृत
राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय छिंदवाड़ा की स्थापना 14 अगस्त 2019 को हुई थी। विश्वविद्यालय के अंतर्गत सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा एवं पांढुर्ना जिले के कॉलेज संबद्ध हैं। विश्वविद्यालय के भवन के लिए छिंदवाड़ा के ग्राम सारना में लगभग 120.125 एकड़ भूमि का आवंटन एवं 486.45 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई थी। साथ ही भवन निर्माण की ड्रॉइंग व डिजाइन भी बनाई गई। विश्वविद्यालय के लिए 325 पदों की स्वीकृति भी शासन द्वारा दी गई। हालांकि छह साल बाद भी शासन ने विश्वविद्यालय को भवन बनाने के लिए बजट जारी नहीं किया। ऐसे में विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कामकाज छिंदवाड़ा के पीजी कॉलेज के लाइब्रेरी भवन में एवं यूटीडी शासकीय लॉ कॉलेज, काराबोह में संचालित किया जा रहा है।
छह साल में बढ़ गई लागत
शासन ने विश्वविद्यालय भवन के डिजाइन के अनुसार वर्ष 2019 में 486.45 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। हालांकि समय के साथ अब भवन की लागत भी बढ़ गई है। बताया जाता है कि छह माह पहले शासन के निर्देश पर रिवाइच्ड बजट भेजा गया है। पूर्व में भवन के लिए स्वीकृत किए गए डिजाइन में फेरबदल कर दिया गया है।
इनका कहना है…
शासन के निर्देश पर रिवाइज्ड बजट भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही विश्वविद्यालय भवन के लिए बजट मिलेगा और काम शुरु कराया जाएगा।
प्रो. इंद्र प्रसाद त्रिपाठी, कुलगुरू, आरएसएस विवि, छिंदवाड़ा