
राजस्थान में पंचायत चुनाव की हलचलों के बीच कई रोचक खबरें सामने आ रही हैं। ऐसी ही एक खबर सीकर से आई है जहां एक ही परिवार की सास-बहू ने चुनाव मैदान में ताल ठोक दी है। हालांकि दोनों ने अलग-अलग वार्ड से नामांकन दाखिल किया है, लेकिन सबसे दिलचस्प बात ये है कि जहां सास भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर प्रत्याशी हैं, तो वहीं उनकी बहू धुर विरोधी कांग्रेस पार्टी से प्रत्याशी हैं। यही वजह है कि दोनों सास-बहू की उम्मीदवारी हर तरफ चर्चा का विषय बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार 'सास' इंद्रा चौधरी ने जिला परिषद के वार्ड 18 से नामांकन दाखिल किया है, तो वहीं 'बहू' सुनीता गठाला वार्ड 11 से कांग्रेस की प्रत्याशी हैं। नामांकन भरने के साथ ही दोनों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं। बता दें कि इन सास-बहू के लिए राजनीतिक पारी नई नहीं है। इंद्रा चौधरी जहां भाजपा पार्टी की जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं, वहीं उनकी बहू कांग्रेस पार्टी से जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं। ये जोड़ी इन्हीं कारणों से पहले भी सुर्ख़ियों में रह चुकी है। अब एक बार फिर पंचायत चुनावों में भी सुर्खियां बटोर रही हैं।
पूर्व में हुए एक चुनाव के दौरान सास-बहू की ये जोड़ी एक-दूसरे के सामने भी लड़ चुकी है। बहू सुनीता गठाला के जिलाध्यक्ष पद पर काबिज होने से पहले वे अपनी सास इंद्रा चौधरी से सियासी मैदान में दो-दो हाथ कर चुकी हैं।
पूर्व में जिला परिषद चुनाव के दौरान वार्ड नंबर 10 से इंद्रा और सुनीता एक दूसरे के प्रतिद्वंदी रहे थे। इस चुनौती में सास अपनी बहु पर भारी पड़ी थी। इंद्रा चौधरी ने तब के चुनाव को ना सिर्फ जीता था, बल्कि पहली बार वार्ड 10 में भाजपा का परचम लहराया था।
बहू सुनीता गठाला भी कांग्रेस पार्टी की सक्रिय नेता रह चुकी हैं। वे कई पदों पर रह चुकी हैं और उनकी निर्विवाद छवि व लंबा राजनीतिक अनुभव उनके लिए प्लस पॉइंट साबित होता है। वे जिला परिषद सदस्य रहकर जन प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं। उनके पति धर्मेन्द्र गिठाला भी राजनीति में सक्रीय नेता है। पिछले दो दशक से भी ज़्यादा वक्त से वे कांग्रेस में विभिन्न पदों पर कार्य कर रहे हैं।
सास इंद्रा चौधरी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था, जिसमें वे जोशीला और दिल छू लेने वाली बात कहती दिख रही हैं। सांगलिया (सीकर) में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने तेज गति और लापरवाही से गाड़ी चलाने वाले युवाओं को जमकर आड़े हाथों लिया था। उन्होंने कहा था कि तेज गाड़ी चलाने से कोई 'हैंडसम' या 'डैशिंग' नहीं दिखता, बल्कि वह बेवकूफ दिखता है।
उनकी कही गई बात लोगों के दिलों को छू गई। उन्होंने कहा था, "एक मां को अपने बच्चे को पाल-पोसकर बड़ा करने में 25 साल लगते हैं, लेकिन वह बच्चा अपनी लापरवाही और तेज ड्राइविंग के कारण मात्र 25 सेकंड में लाश बन जाता है।" उन्होंने युवाओं से अपील की कि अगर उन्हें अपनी ताकत और स्पीड ही दिखानी ही है, तो सड़कों पर गाड़ी भगाने के बजाय मिल्खा सिंह की तरह दौड़ें या नीरज चोपड़ा की तरह भाला फेंक कर देश का नाम रोशन करें।