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Exclusive: राजस्थान के खंडेला में बनेगा पहला यूरेनियम प्लांट, 500 बीघा जमीन अधिग्रहण की तैयारी

सीकर जिले में खंडेला क्षेत्र के रॉयल गांव में 3,000 करोड़ रुपए की लागत से राजस्थान का पहला यूरेनियम प्लांट बनेगा। 500 बीघा से अधिक जमीन अधिग्रहण की तैयारी है। प्रोजेक्ट 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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Updated: 25 Oct 2026, 8:33 AM IST
rajasthan first uranium plant
सीकर में खंडेला के रॉयल में यूरेनियम की खुदाई के लिए बनी सुरंग (पत्रिका फाइल फोटो)

-अजय शर्मा

Rajasthan Uranium Plant: सीकर: राजस्थान अब परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सीकर जिले के खंडेला क्षेत्र के रॉयल गांव में प्रदेश का पहला यूरेनियम प्लांट स्थापित करने की कवायद तेज हो गई है। यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) ने इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

इसके लिए जमीन अधिग्रहण की तैयारी शुरू कर दी गई है। 500 बीघा से अधिक जमीन अधिग्रहित की जानी है। प्रशासन खातेदारों का छह महीने तक सर्वे कराएगा। इसमें उनकी आर्थिक-सामाजिक स्थिति, खेती और रोजगार के लिए नौकरी पर निर्भरता का आकलन किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा तय किया जाएगा। अगले साल अप्रैल तक जमीन अधिग्रहण पूरा करने की तैयारी है।

सीकर से पाइपलाइन के जरिए पहुंचेगा पानी

प्लांट के लिए सीकर शहर से पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाया जाएगा। इसके लिए नगर परिषद और यूसीआईएल के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है। इसके अलावा झुंझुनूं के उदयपुरवाटी क्षेत्र के जहाज और नृसिंहपुरी तथा नीमकाथाना क्षेत्र में भी यूरेनियम के भंडार मिलने की संभावना है। रॉयल परियोजना के बाद इन क्षेत्रों में भी सर्वे कराया जा सकता है।

12 मिलियन टन यूरेनियम भंडार की पुष्टि

खंडेला क्षेत्र के रॉयल गांव में 1,086.46 हेक्टेयर क्षेत्र में यूरेनियम भंडार होने की वर्ष 2005 में पुष्टि हुई थी। यहां करीब 12 मिलियन टन यूरेनियम भंडार होने की संभावना जताई गई है। खनिज विभाग ने यूसीआईएल के आवेदन पर वर्ष 2022 में खनन के लिए आशय पत्र (एलओआई) जारी किया था।

3,000 करोड़ रुपए का निवेश

प्रोजेक्ट पर करीब 3,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इससे सीकर जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 5,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। रॉयल और सुहागपुरा गांवों में करीब 400 फीट गहराई तक खुदाई कर यूरेनियम निकाला जाना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यहां चट्टानों के बीच धार के रूप में यूरेनियम मिला है। इसकी गुणवत्ता झारखंड में पाए जाने वाले यूरेनियम के समान बताई गई है। खनन के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रक्रिया भी जारी है।

प्रोजेक्ट पर एक नजर

  • 1998: यूरेनियम की प्रारंभिक जानकारी मिली
  • 1999: ड्रिलिंग से खुदाई शुरू हुई
  • 2005: यूरेनियम भंडार की पुष्टि हुई
  • 2016: प्रोजेक्ट के लिए कवायद शुरू हुई
  • 1 किमी: यूरेनियम खनन के लिए सुरंग की लंबाई
  • 6 मीटर: सुरंग की चौड़ाई
  • 22 करोड़ रुपये: सुरंग पर खर्च का अनुमान
  • 3,000 करोड़ रुपये: प्रोजेक्ट की अनुमानित कुल लागत
  • 12 मिलियन टन: रॉयल में यूरेनियम भंडार होने की संभावना
  • 1,086.46 हेक्टेयर: यूरेनियम भंडार वाला क्षेत्र
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25 Oct 2026, 8:33 AM IST
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