
Sri Ganganagar Panchayat Elections : श्रीगंगानगर. कभी गांव के गुवाड़ और चौपाल में किसी व्यक्ति की जुबान ही उसकी पहचान हुआ करती थी। बुजुर्गों के बीच कही गई बात को वचन माना जाता और उसे निभाना प्रतिष्ठा का सवाल होता था। चुनाव में भी इसी भरोसे के सहारे समर्थन जुट जाता था। अब दौर बदल गया है। वादे भी है, दावे भी और मतदाताओं तक पहुंचने के लिए हाईटेक प्रचार भी। ऐसे में सवाल है कि क्या गांवों की राजनीति में जुबान की कीमत कम हुई है या मतदाताओं की कसौटी बदल गई है? पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की सरगर्मी के बीच ग्रामीण अंचल में सरपंची से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद तक के पदों को लेकर जोर आजमाइश तेज हो रही है। संभावित प्रत्याशी गांव-गांव संपर्क साध रहे हैं।
श्रीगंगानगर जिले में पहले 9 पंचायत समितियां थीं, जो अब बढ़कर 11 हो गई है। जिला परिषद के जोन 31 से बढ़कर 39 और पंचायत समिति वार्ड 183 से बढकर 221 हो गए है। ग्राम पंचायतों की संख्या भी 345 से बढ़कर 409 हो गई है। जिला परिषद की संख्या पहले की तरह एक ही है। संस्थाओं और प्रतिनिधित्व का दायरा बढने से ग्रामीण राजनीति में नए चेहरों और नए समीकरणों के लिए भी जगह बनी है।
सड़क, पेयजल, सफाई, नाली और रोशनी जैसी बुनियादी समस्याएं आज भी ग्रामीण मतदाताओं की प्राथमिकता हैं। ऐसे में प्रत्याशी की लोकप्रियता के साथ उसकी कार्यक्षमता और लोगों के बीच उपलब्धता भी मायने रखेगी। पंचायतों का दायरा बढ़ा है, प्रचार के तरीके बदले हैं और चुनावी प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है, लेकिन चौपाल का पुराना सवाल आज भी कायम हैजो कहा है, क्या वह करके भी दिखाएंगे?
अनूपगढ़ क्षेत्र के हरिराम मेघवाल ग्राम सेवा सहकारी समिति के अध्यक्ष, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान और जिला परिषद सदस्य रह चुके हैं। वे एक बार अनूपगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक का चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनका कहना है कि पहले गांव के गुवाड़ और चौपाल में व्यक्ति जो बात कह देता था, उसे निभाना अपनी प्रतिष्ठा का सवाल मानता था। समय के साथ सामाजिक व्यवहार और चुनावी तौर-तरीके बदले हैं। अब कही गई बात और किए गए काम के बीच अंतर भी दिखाई देता है।
रावला क्षेत्र से जिला परिषद सदस्य बंसीलाल बिश्नोई कहते हैं कि पहले आपसी विश्वास अधिक था। किसी के बारे में नकारात्मक बात सुनने पर उसकी सच्चाई जानने की कोशिश की जाती थी। अब कई बार पूरी बात जाने बिना ही धारणा बना ली जाती है, जिसका असर रिश्तों और चुनावी समीकरणों पर भी पड़ता है।
पंचायत समिति रायसिंहनगर की उप प्रधान संतोष बिश्नोई कहती है कि पंचायत चुनाव में अब व्यक्तिगत संपर्क के साथ मोबाइल फोन और सोशल मीडिया की भूमिका भी बढ़ रही है। युवा, पढ़े-लिखे लोग और महिलाएं सरपंची से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद तक की राजनीति में आगे आ रहे हैं। नए चेहरे हाईटेक जमाने के साथ चुनावी मैदान में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं।