श्री गंगानगर

राम की लीलाएं देखने दर्शक चक्करघिन्नी!

यह किसी ख्यात कलाकारों की फिल्म का शो नहीं हैं। फिर भी दर्शक न केवल उमड़े हैं बल्कि चक्करघिन्नी हैं। कोई इधर भाग रहा है तो कोई उधर जा रहा है।

2 min read
राम की लीलाएं देखने दर्शक चक्करघिन्नी!

श्रीगंगानगर.

यह किसी ख्यात कलाकारों की फिल्म का शो नहीं हैं। फिर भी दर्शक न केवल उमड़े हैं बल्कि चक्करघिन्नी हैं। कोई इधर भाग रहा है तो कोई उधर जा रहा है। दर्शक यह तय ही नहीं कर पाए हैं कि वो क्या छोड़ें और क्या देखें। दरअसल, यह हाल श्रीगंगानगर में चल रही दो रामलीलाओं का है। दोनों के आयोजन स्थल पास-पास हैं, लिहाजा, लाउडस्पीकर की तेज आवाज एक दूसरे आयोजन में खलल पैदा कर रही है। इस कोलाहाल में दर्शक अगर दोनों आयोजन स्थलों के बीच में खड़ा जाए तो एकबारगी वह तय ही नहीं कर पाएगा कि यह रामलीला हो रही है या महाभारत।

थोड़ी सी खामोशी के बीच अगर दर्शकों को बगल वाली रामलीला का कोई डायलॉग सुनता है तो वे वहां से उठकर दूसरी जगह चले जाते हैं। दोनों तरफ आना-जाना लगा है। तभी तो जितने दर्शक कुर्सियों पर जमे हैं उनसे ज्यादा खड़े हो कर यह नजारा देख रहे हैं। हां रामलीलाओं में दर्शकों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। आकर्षक रोशनी, शानदार मंच, पर्दे, साउंड दोनों ही जगह इस तरह का नजारा है कि दर्शक तय नहीं कर पा रहा है कि किस रामलीला का चयन करें।


यह दोनों ही आयोजकों की बीच एक अदृश्य प्रतिस्पर्धा है जो दर्शकों को चकाचौंध व आधुनिक तकनीक से लैस साजोसामान के साथ राम की लीला अर्थात रामलीला देखने को मजबूर कर रही है। खास व गौर करने वाली बात यह है कि मोबाइल व टीवी क्रांति के बावजूद दोनों ही रामलीलाओं में दर्शक काफी संख्या में उमड़े हैं। महिलाओं की संख्या भी अच्छी खासी है। अदृश्य प्रतिस्पर्धा को बल इसीलिए भी मिलता है क्योंकि शहर में कई जगह रामलीलाओं के बड़े बड़े बैनर व होर्डिंग्स भी लगे हैं।


श्री सनातन धर्म रामलीला समिति
स मिति की ओर से गोपीराम गोयल की बगीची में हो रही रामलीला में हाइटैक पर्दे के समक्ष संवाद अदायगी हो रही थी। यहां शुक्रवार राम जन्म और सीता जन्म सहित कई प्रसंगों का वर्णन किया गया। राम जन्म के प्रसंग में राजा दशरथ के दरबार में राम जन्म से पूर्व की स्थिति इसके बाद भगवान राम के जन्म के दृश्यों का मंचन किया गया। इसके बाद सीता जन्म का भी मंचन किया गया।


श्री हनुमान राम नाटक समिति
समिति की ओर से रामलीला मैदान में खेली जा रही रामलीला में लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। यहां शुक्रवार को भगवान राम शिव धनुष तोडऩे के दृश्य का मंचन किया गया। इसमें भगवान राम के शिव धनुष तोडऩे के बाद परशुराम के राजा जनक के दरबार में पहुंचने का मंचन किया गया। जहां एक ओर क्रोध से भरे भगवान परशुराम का मंच पर अभिनय देखते ही बनता था, वहीं लक्ष्मण के रूप में मंच पर बेहतरीन संवाद अदायगी की गई।

Published on:
23 Sept 2017 07:37 am
Also Read
View All