श्री गंगानगर

विश्व पशु चिकित्सा दिवस: दो साल बाद भी पशुगणना के आंकड़े सार्वजनिक नहीं

- सात साल पुराने आंकड़ों के आधार पर बन रही योजनाएं, विभाग असमंजस में, पुराने आंकड़ों के सहारे ही काम करने को विवश, टॉल फ्री नम्बर पर पशु बीमार की सूचना बन रही पशुपालको का सहारा

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श्रीगंगानगर. विश्व पशु चिकित्सा दिवस के अवसर पर जहां पशु स्वास्थ्य और कल्याण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की बात की जा रही है, वहीं जिले में पशुपालन विभाग अब भी पुराने आंकड़ों के सहारे योजनाएं बनाने को मजबूर है। वर्ष 2024 में पशुगणना पूरी हो जाने के बावजूद इसके आंकड़े अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर योजना निर्माण प्रभावित हो रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नवीन पशुगणना के आंकड़े समय पर जारी किए जाएं तो योजनाओं को और अधिक प्रभावी और जरूरत आधारित बनाया जा सकता है। फिलहाल विभाग पुराने आंकड़ों के सहारे ही काम करने को विवश है।
संयुक्त निदेशक डॉ. अरविन्द मित्तल ने बताया कि भारत सरकार की ओर से अभी तक नवीन पशुगणना के आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में विभाग को वर्ष 2019 की पशुगणना के आधार पर ही कार्य करना पड़ रहा है। इन आंकड़ों के अनुसार जिले में 6,36,704 गाय, 2,00,125 भैंसें, 2,33,917 भेड़ें, 3,03,487 बकरियां, 50,014 कुत्ते, 5,711 ऊंट और 923 घोड़े दर्ज किए गए थे। पशुओं के उपचार और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जिले में पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है। वर्तमान में दो पॉली क्लीनिक, 8 वीवीएचओ केंद्र, 19 प्रथम श्रेणी अस्पताल, 51 वेटरनरी क्लीनिक, 173 सब सेंटर और एक मोबाइल यूनिट संचालित हैं। इसके अलावा 82 पशु चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं।





बीमार पशु के लिए 1962 पर करें कॉल








पशुपालकों की सुविधा के लिए विभाग ने टोल फ्री नंबर 1962 भी संचालित कर रखा है। इस नंबर पर कॉल करने पर मोबाइल वेटरनरी यूनिट पशुपालकों के घर पहुंचकर पशुओं का उपचार करती है। जिले में श्रीगंगानगर, सूरतगढ़ और सादुलशहर में दो-दो तथा अन्य ब्लॉकों में एक-एक मोबाइल वाहन तैनात है। यह सेवा सुबह 8:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक उपलब्ध रहती है। इस समय के बाद प्राप्त कॉल पर अगले दिन उपचार की व्यवस्था की जाती है। वहीं, ऑनलाइन शिकायत के माध्यम से 24 घंटे परामर्श सेवा भी दी जा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 24 फरवरी 2024 से 15 अप्रैल 2026 तक इस सेवा के जरिए 56,939 पशुपालक लाभान्वित हो चुके हैं।






अब राष्ट्रीय पशु ऊंट के संरक्षण पर फोकस, बीस हजार की सहायता






राष्ट्रीय पशु ऊंट के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए पशुपालन विभाग ने विशेष पहल शुरू की है। इसके तहत जिले में ऊंट पालकों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि इस पारंपरिक पशुधन को बचाया जा सके और इसके पालन को प्रोत्साहन मिले। संयुक्त निदेशक मित्तल ने बताया कि सरकार की बजट घोषणा के अनुसार ऊंटनी के बच्चे (टोडियो) के पालन-पोषण के लिए पशुपालकों को कुल 20 हजार रुपए की वित्तीय सहायता दी जा रही है। यह राशि दो किस्तों में दी जाएगी, जिसमें प्रत्येक किस्त 10-10 हजार रुपए की होगी। उन्होंने बताया कि जिले में ऊंट का उपयोग सीमित हो गया है। जिले में अब मुख्य रूप से सूरतगढ़ ब्लॉक में ही खेती के कार्यों के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा अन्य क्षेत्रों में ऊंटों का उपयोग अधिकतर ईंट-भट्टों पर भार ढोने के लिए किया जा रहा है।





Updated on:
25 Apr 2026 01:20 pm
Published on:
25 Apr 2026 01:19 pm
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