
Tonk : टोंक जिले की ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक स्थलों पर एक बार फिर फिल्म जगत की नजर है। फिल्म अभिनेता बॉबी देओल की चर्चित वेब सीरीज आश्रम के चौथे सीजन की शूटिंग टोंक जिले में किए जाने की तैयारी सामने आई है। इसके लिए गहलोद पुलिया पर शूटिंग की अनुमति मांगी गई है। इस संबंध में अतिरिक्त जिला कलक्टर विनोद कुमार मीना ने पुलिस अधीक्षक के साथ टोंक और पीपलू उपखंड अधिकारी को पत्र जारी किया है। अनुमति प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ ही जिले में फिल्मांकन की संभावनाएं बढ़ी है। हालांकि शूटिंग की तारीख, अवधि और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
गहलोद पुलिया पर प्रस्तावित शूटिंग से टोंक की लोकेशन एक बार फिर बड़े पर्दे और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दिखाई दे सकती है। फिल्म और वेब सीरीज की शूटिंग के लिए किसी स्थान का चयन उसकी भौगोलिक बनावट, प्राकृतिक दृश्य, ऐतिहासिक महत्वपूर्ण और कहानी की जरूरतों के आधार पर किया जाता है। गहलोद क्षेत्र की लोकेशन को लेकर मांगी गई अनुमति इसी दिशा में एक महत्तवपूर्ण कदम है। शूटिंग की अनुमति मिलने और कार्यक्रम तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि यहां किस तरह के दृश्य फिल्माए जाएंगे।
टोंक जिला फिल्मांकन के लिहाज से नया नहीं है। जिले की ऐतिहासिक इमारतें, बावड़ियां और बनास नदी का प्राकृतिक परिवेश पहले भी फिल्म निर्माताओं को आकर्षित कर चुका है। वर्ष 2005 में रिलीज हुई शाहरुख खान और रानी मुखर्जी अभिनीत फिल्म पहेली की शूटिंग टोंक जिले के टोडारायसिंह स्थित ऐतिहासिक हाड़ी रानी की बावड़ी में हुई थी। अपनी विशिष्ट स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक पहचान के कारण यह स्थल फिल्म के दृश्यों के लिए खास रहा।
इसी तरह कमाल अमरोही के निर्देशन में बनी ऐतिहासिक फिल्म रजिया सुल्तान के कुछ दृश्यों और गीतों की शूटिंग भी टोंक जिले में बनास नदी के रेतीले क्षेत्र में हुई थी। हेमा मालिनी अभिनीत इस फिल्म में ऐतिहासिक परिवेश को दर्शाने के लिए प्राकृतिक और रेगिस्तानी लोकेशन का उपयोग किया गया था। इससे टोंक जिले के प्राकृतिक भू-दृश्यों को बड़े पर्दे पर पहचान मिली।
फिल्मों और वेब सीरीज की शूटिंग किसी क्षेत्र की पहचान बढ़ाने का माध्यम बन सकती है। यदि आश्रम-4 की शूटिंग गहलोद पुलिया पर होती है। तो टोंक की यह लोकेशन भी दर्शकों के बीच चर्चा में आ सकती है। इससे जिले के ऐतिहासिक स्थलों, प्राकृतिक परिवेश और पर्यटन संभावनाओं की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित होने की उम्मीद रहेगी। फिल्मांकन के दौरान स्थानीय स्तर पर परिवहन, खान-पान, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों को काम मिलने की संभावना भी रहती है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ शूटिंग दल के आकार, यहां बिताए जाने वाले समय और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर निर्भर करेगा।
फिल्म की शूटिंग के लिए अनुमति मांगी गई है। इसके लिए पुलिस अधीक्षक और टोंक व पीपलू उपखंड अधिकारी को पत्र जारी किया है। उनकी रिपोर्ट के आने के बाद अनुमति दी जाएगी।
विनोद कुमार मीना, अतिरिक्त जिला कलक्टर टोंक