
Udaipur : साची मेवाड़ा। फोटो पत्रिका
Udaipur : उदयपुर. भारी लोहे के पाइप, आंखों को चौंधियाने वाली वेल्डिंग की तेज चिंगारियां और ग्राइंडर की गूंजती आवाज… आमतौर पर इस माहौल को पुरुषों का एकाधिकार माना जाता रहा है। लेकिन, महाराष्ट्र मूल की उदयपुर निवासी कलाकार साची मेवाड़ा ने तमाम सामाजिक रूढ़ियों और लैंगिक सीमाओं को पिघलाकर रख दिया। कभी टैटू आर्टिस्ट रहीं और मुश्किल वक्त में डिलीवरी राइडर बनीं साची आज साइट पर उतरकर खुद भारी रेलिंग और स्टील फैब्रिकेशन का काम करती हैं। 'गुड़िया से यह काम नहीं होगा' जैसे तानों को अपनी ताकत बनाकर उन्होंने इस कठिन माने जाने वाले क्षेत्र में अपनी ऐसी अलग पहचान बनाई है कि आज देश भर के बड़े इंजीनियरिंग ब्रांड्स उनके हुनर को सलाम कर रहे हैं।
साची और उनके पति शुभम कला से गहरा लगाव रखते थे। दोनों ने महाराष्ट्र में टैटू स्टूडियो शुरू किया था, जो अच्छा चल रहा था। तभी कोरोना ने दस्तक दी और काम ठप हो गया। महामारी के बाद दोनों उदयपुर पहुंचे। यहां भी माहौल अनिश्चित था, लेकिन गुजर-बसर, कमरे का किराया और ईएमआइ चुकाने के लिए दोनों ने फूड डिलीवरी राइडर का काम शुरू किया। हालांकि, सीमित आमदनी और दूसरी लहर की पाबंदियों के बीच जमा-पूंजी खत्म होने लगी। तब दोनों ने तय किया कि एक नई दिशा में हुनर आजमाएंगे।
उदयपुर में साची के पति का पारिवारिक काम देखते हुए दोनों ने स्टील और फैब्रिकेशन सीखने का फैसला किया। जब साची फैब्रिकेशन वेल्डिंग क्षेत्र में उतरी तो दावा किया जाने लगा कि वह देश की पहली महिला है, जो इस क्षेत्र में है। देश की कई बड़ी कम्पनियों ने भी इस दावे को स्वीकार किया और उन्हें सम्मान दिया। साची ने अपने हुनर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा। ऐसे में वे सोशल मीडिया पर भी स्पेशल गर्ल बनकर उभरी। लोगों ने उनके काम को खूब सराहा।
बचत के कुछ पैसों और साथी के अपने नाना के सहयोग से एक मशीन खरीदकर छोटे-मोटे काम शुरू किए। वर्ष 2021 में दुकान खोली और काम पटरी पर आने ही लगा था कि एक हादसा हो गया। साइट पर काम के दौरान कटर मशीन का व्हील टूटकर शुभम के चेहरे पर लगा, जिससे उनकी आंख के पास गंभीर चोट आई। डॉक्टरों ने उन्हें साल भर के बेड रेस्ट की सलाह दी। काम बंद हुआ और आर्थिक संकट गहरा गया। लेकिन, साची ने हिम्मत नहीं हारी और खुद को साबित किया।
मैं चाहती हूं कि मेरी कहानी उन सभी लड़कियों के लिए एक मिसाल बने, जिन्हें कभी यह कहकर रोक दिया गया कि वे कुछ नहीं कर सकतीं। मैं चाहती हूं कि कोई भी लड़की सिर्फ इसलिए अपने सपनों को न छोड़ दे, क्योंकि लोग कहते हैं कि यह काम लड़कियों के लिए नहीं है। क्योंकि मैंने अपनी जिंदगी में यही सीखा है कि मुश्किलें कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर अंदर कुछ करने का जुनून है तो पहचान खुद बना सकते हैं।
Published on:
17 Oct 2026 07:00 am
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