
- 200 किमी दूर से पहुंच रहे वाहन चालक, तीन दिन में भी नहीं आ रहा नंबर
उदयपुर. शहर में वाहन फिटनेस जांच की व्यवस्था इन दिनों पटरी से उतरती नजर आ रही है। सीमित संख्या में संचालित सेंटर और एक दिन में अधिकतम 50 वाहनों के फिटनेस करने के परिवहन मुख्यालय के निर्देश से वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हो गए कि 150 से 200 किलोमीटर दूर से फिटनेस जांच के लिए उदयपुर पहुंच रहे वाहन चालक को तीन दिन इंतजार के बाद भी नंबर नहीं मिल रहा।
जिले में वर्तमान में केवल दो ही फिटनेस सेंटर हैं। परिवहन विभाग के निर्देशानुसार हर सेंटर केवल 8 घंटे में 50 वाहनों की ही फिटनेस जांच कर सकता है। जबकि जिले और आसपास के क्षेत्रों से रोजाना सैकड़ों वाहन पहुंचते हैं। इसके कारण बैकलॉग बढ़ रहा है। स्थानीय वाहन व्यवसायियों का कहना है कि इतने कम सेंटर और धीमी प्रक्रिया से चालकों की परेशानियों में लगातार वृद्धि हो रही है।
लंबी कतार में खड़े रहने को मजबूर चालक
फिटनेस सेंटरों के बाहर सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। कई चालक रात में ही सेंटर के बाहर आकर लाइन में लग जाते हैं ताकि उन्हें अगले दिन नंबर मिल सके। इसके बावजूद कई बार नंबर नहीं मिल पाता और उन्हें बिना जांच कराए वापस लौटना पड़ता है। खुले में लंबा समय खड़े रहने, धूप, गर्मी और अव्यवस्था के कारण चालकों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
---तीन दिन में भी नहीं आ रहा नंबर
चालकों का कहना है कि वे लगातार दो से तीन दिन तक सेंटर के चक्कर काट रहे हैं, पर जांच का नंबर नहीं आ पा रहा है। कई वाहन मालिकों को मजबूरी में अपने वाहन वहीं खड़े छोड़ने पड़ रहे हैं। वाहन व्यवसायियों ने बताया कि लंबे समय तक इंतजार करना उनके लिए आर्थिक रूप से हानिकारक साबित हो रहा है
आर्थिक नुकसान और बढ़ता तनाव
फिटनेस जांच में देरी के कारण वाहन चालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई वाहन व्यवसायिक उपयोग में हैं, इनका खड़ा रहना उनकी आमदनी को प्रभावित कर रहा है। साथ ही फिटनेस अवधि समाप्त होने पर चालान और जुर्माने का डर भी बना रहता है। इससे चालकों में तनाव और असंतोष बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति इसी तरह बनी रही, तो छोटे और मझोले व्यवसायियों की रोजमर्रा की आय पर गंभीर असर पड़ सकता है।
दूरदराज क्षेत्रों से आ रहे वाहन
उदयपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी वाहन चालक फिटनेस जांच के लिए यहां पहुंच रहे हैं। 150- 200 किलोमीटर तक का सफर तय कर आने वाले चालकों को कई दिन तक इंतजार करना पड़ता है, इससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है। वाहन मालिकों ने कहा कि कभी-कभी वाहन वहीं खड़े रह जाते हैं और उनके संचालन पर असर पड़ता है।---
प्रशासन से सुधार की मांग
स्थानीय वाहन चालकों और परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि फिटनेस सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाए और जांच प्रक्रिया को तेज किया जाए। साथ ही ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग व्यवस्था को प्रभावी बनाने और अतिरिक्त स्टाफ की नियुक्ति की भी आवश्यकता जताई गई है।
चार दिन वाहन खड़ा रहने से हमारी आमदनी आधी रह गई। अगर प्रशासन जल्दी कदम नहीं उठाए, तो छोटे व्यवसायी और आर्थिक रूप से प्रभावित होंगे।
मुकेश पालीवाल, बस मालिक
हर सेंटर में रोजाना सिर्फ 50 वाहन जांचने की सीमा अब वास्तविकता के अनुरूप नहीं है। संख्या बढ़ाई जाए, वरना ऑपरेटर व चालक लगातार नुकसान झेलते रहेंगे।
डाल चन्द जोशी, बस मालिक
--वर्तमान में सेंटरों में लंबी कतारें और 50 वाहन प्रति दिन की सीमा चालकों के लिए कठिनाई पैदा कर रही है। प्रशासन तेजी से समाधान ला रहा है। जल्द ही सेंटरों की संख्या बढ़ाई जाएगी, जांच प्रक्रिया तेज होगी और ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग को प्रभावी बनाया जाएगा।
ज्ञानदेव विश्वकर्मा, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी