उदयपुर

BJP leader Blackmailing Case: राजस्थान के ‘उदयपुर फाइल्स’ केस के आरोपी को 7 महीने बाद ज़मानत, जानें भाजपा नेत्री ने क्या लगाए थे संगीन आरोप? 

Udaipur News : राजस्थान के उदयपुर फाइल्स वीडियो ब्लैकमेलिंग केस में बड़ा अपडेट। बीजेपी नेत्री से जुड़े मामले में सात माह से जेल में बंद आरोपी विशाल गुर्जर को हाईकोर्ट से मिली जमानत।
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Updated: 16 Sep 2026, 2:34 PM IST
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Udaipur Files Blackmailing Case- AI Generated PIC

राजस्थान के बहुचर्चित 'उदयपुर फाइल्स' वीडियो ब्लैकमेलिंग केस में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की एक महिला नेत्री द्वारा दर्ज कराए गए संगीन आरोपों के मामले में पिछले सात माह से जेल में बंद मुख्य आरोपी विशाल गुर्जर को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप शाह की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी विशाल गुर्जर को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक अन्य जमानत राशि जमा कराने की शर्त पर रिहा करने के आदेश जारी किए हैं। बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में दलील दी कि पुलिस द्वारा जब्त की गई डिजिटल सामग्रियों और सीडी में किसी भी आपत्तिजनक वीडियो की पुष्टि नहीं हुई है और मामले में चार्जशीट भी दाखिल की जा चुकी है, जिसके बाद अदालत ने ज़मानत याचिका स्वीकार कर ली।

उदयपुर के स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक हलकों में 'उदयपुर फाइल्स' के नाम से सुर्खियां बटोरने वाला यह मामला इस साल की शुरुआत में फरवरी महीने में सामने आया था। बीजेपी की एक स्थानीय महिला पदाधिकारी ने उदयपुर के भूपालपुरा थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोपी पर धोखे से बुलाकर नशीला पदार्थ पिलाने और फिर आपत्तिजनक वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने के बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था और पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी विशाल गुर्जर को रातों-रात गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद से ही आरोपी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था।

बचाव पक्ष की दलीलें और हाईकोर्ट का फैसला

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ में जस्टिस संदीप शाह की अदालत के समक्ष विशाल गुर्जर की जमानत याचिका पर विस्तार से बहस हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने मजबूती से अदालत के सामने तथ्य रखा कि पुलिस जांच और एफएसएल (FSL) की जब्ती रिपोर्ट में भी ऐसा कोई वीडियो या आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है जो शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि करती हो।

मामले में पुलिस अनुसंधान पूरा करके संबंधित अदालत में पहले ही चार्जशीट पेश कर चुकी है, ऐसे में आरोपी को आगे हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं बनता। सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने विशाल गुर्जर को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि की ज़मानत पर रिहा करने का आदेश सुनाया।

उल्लेखनीय है कि आरोपी विशाल गुर्जर को पिछले महीने ही इस केस से जुड़े एक अन्य धोखाधड़ी के मामले में भी अदालत से जमानत मिल चुकी थी।

क्या था पूरा मामला?

यह पूरा घटनाक्रम 11 फरवरी 2026 को उदयपुर शहर के भूपालपुरा पुलिस थाने में दर्ज कराई गई एक एफआईआर से शुरू हुआ था, जिसने पूरे शहर में सनसनी फैला दी थी। पीड़िता (बीजेपी नेत्री) ने अपनी लिखित रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि आरोपी विशाल गुर्जर ने किसी काम के सिलसिले में उसे अपने दफ्तर बुलाया था।

रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने दफ्तर में पीड़िता को धोखे से कोई नशीला या बेहोशी युक्त पेय पदार्थ पिला दिया, जिससे वह बेसुध हो गई। पीड़िता का आरोप था कि बेहोशी की हालत में आरोपी ने उसका आपत्तिजनक वीडियो तैयार कर लिया और बाद में उसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसे मानसिक व सामाजिक रूप से ब्लैकमेल करने लगा।

सात माह बाद जेल से बाहर आएगा आरोपी

हाईकोर्ट से ज़मानत मंजूर होने के बाद विशाल गुर्जर की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। 'उदयपुर फाइल्स' के नाम से चर्चा में आए इस केस में हाईकोर्ट के इस आदेश को बचाव पक्ष के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले के बाद बहस और चर्चाओं का दौर फिर से शुरू हो गया है।

Updated on:
16 Sep 2026, 2:34 PM IST
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