
Udaipur Mayor Election News: उदयपुर नगर निगम के महापौर पद को लेकर भाजपा में चल रही खींचतान के बीच आखिरकार पारस सिंघवी के नाम पर सहमति बन गई। पार्टी ने सिंघवी को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है। बुधवार दोपहर सिंघवी ने समर्थकों और पार्टी नेताओं के साथ नगर निगम पहुंचकर नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान वे भावुक नजर आए। सिंघवी के साथ भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, पूर्व महापौर जीएस टांक, रजनी डांगी, चंद्रसिंह कोठारी और पूर्व सभापति युधिष्ठिर कुमावत सहित कई नेता मौजूद रहे। पार्षद पंकज बोराणा सिंघवी के प्रस्तावक बने।
महापौर पद के लिए भाजपा में दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर के नाम प्रमुखता से चल रहे थे। दोनों नामों को लेकर पार्टी के भीतर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद पारस सिंघवी के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। पार्टी में चल रही खींचतान के बीच सिंघवी के नाम को लेकर संगठन स्तर पर भी चर्चा हुई। उनके नाम पर सहमति बनने के बाद बुधवार को उन्होंने नामांकन दाखिल किया।
महापौर पद के साथ उपमहापौर के नाम को लेकर भी भाजपा में चर्चा जारी है। ब्राह्मण चेहरे के तौर पर दिनेश भट्ट को उपमहापौर बनाने का प्रस्ताव दिए जाने की चर्चा है। यदि भट्ट सहमत नहीं होते हैं तो अशोक नागदा या जतिन श्रीमाली के नाम पर विचार किया जा सकता है। सिंघवी के नाम पर सहमति बनाने में भाजपा शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह राठौड़ की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उदयपुर नगर निगम के सात बोर्ड के इतिहास में यह पहली बार बताया जा रहा है कि नामांकन की अंतिम समय-सीमा से महज दो घंटे पहले भाजपा ने महापौर प्रत्याशी के नाम को अंतिम रूप दिया। इस बार आधा दर्जन से अधिक दिग्गज चेहरों के नाम चर्चा में आने के कारण पार्टी के भीतर खींचतान बढ़ गई थी।
दिनेश भट्ट और प्रमोद सामर के नाम को लेकर भाजपा के अलग-अलग गुटों में मतभेद सामने आए। कटारिया गुट और शहर विधायक ताराचंद जैन दिनेश भट्ट के समर्थन में थे, जबकि पार्टी के कुछ पदाधिकारी प्रमोद सामर के नाम पर सहमति बनाने में जुटे थे। शहर विधायक ताराचंद जैन ने कहा था कि दिनेश भट्ट जैसे वरिष्ठ नेता को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए उचित नहीं होगा और इससे कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश जा सकता है।
उधर, कांग्रेस ने महापौर पद के लिए पूनम कुंवर को प्रत्याशी बनाया है। पूनम कुंवर कांग्रेस शहर जिलाध्यक्ष फतेहसिंह राठौड़ की पत्नी हैं। पार्टी में बुधवार दोपहर तक प्रत्याशी के नाम को लेकर मंथन चलता रहा। इसके बाद पूनम कुंवर ने महापौर पद के लिए नामांकन दाखिल किया।
भाजपा में विवाद के बीच पहली बार पार्षद बने जतिन श्रीमाली, कविता जोशी और अशोक नागदा के नाम भी महापौर और उपमहापौर पद के लिए चर्चा में रहे। जतिन श्रीमाली पूर्व जिलाध्यक्ष रवींद्र श्रीमाली के भतीजे हैं। कविता जोशी भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रह चुकी हैं, जबकि अशोक नागदा को गजपाल सिंह और प्रमोद सामर के करीबी नेताओं में माना जाता है।
दयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों के साथ ही शहर की भावी सरकार की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शहर के कुल 80 वार्डों में से 53 सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर निगम में अपना पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही निगम में भाजपा का मेयर बनना और बोर्ड गठित होना तय हो गया है।
उदयपुर नगर निगम में कुल 80 वार्ड (पार्षद) हैं। किसी भी पार्टी को अपना मेयर चुनने और बोर्ड बनाने के लिए जादूई आंकड़े 41 की जरूरत होती है। चुनावी नतीजों में भाजपा ने इस आंकड़े को आसानी से पार कर लिया है। भाजपा के पास बहुमत के न्यूनतम आंकड़े (41) से 12 सीटें अधिक हैं, जिससे उसे बोर्ड बनाने के लिए किसी भी निर्दलीय या अन्य पार्टी के समर्थन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वहीं दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस मात्र 23 सीटों पर सिमट कर रह गई है, जबकि 4 सीटों पर अन्य प्रत्याशियों को सफलता मिली है।
| पार्टी / दल | जीतीं सीटें | स्थिति |
|---|---|---|
| भाजपा (BJP) | 53 | स्पष्ट बहुमत |
| कांग्रेस (INC) | 23 | मुख्य विपक्षी दल |
| अन्य / निर्दलीय | 4 | अन्य |
| कुल सीटें | 80 | बहुमत का आंकड़ा: 41 |