
धीरेंद्र् जोशी/उदयपुर. लालन के उदयपुर पधारने की चौथी वर्षगांठ को लेकर सोमवार शाम को श्रीनाथजी की हवेली में विविध मनोरथ हुए। इन मनोरथों में ठाकुरजी सावन-भादौ और कुंज में बिराजे, वहीं श्रीनाथजी को कलियों का शृंगार धराया गया।
श्रीनाथजी की हवेली में शाम 5.30 बजे से ही वैष्णवजनों के आने का क्रम शुरू हो गया। करीब 6.15 बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही वैष्णवजनों में दर्शन करने की होड़ मच गई। कलियों के शृंगार में प्रभु श्रीनाथजी की छवि ने भक्तों को बांध दिया। इधर श्रीजी बाबा के सम्मुख मणी कोठे में कुंज में मदनमोहनजी बिराजे। यहां केले और चंदन के पत्तों, फूल-मालाओं से सुंदर कुंज बनाया गया। प्रभु के दर्शन करने के लिए भक्त काफी देर तक मंदिर में खड़े रहे।
इधर काली छतरी में प्रभु दाऊदयाल सावन-भादौ में बिराजे। खस के टेरे भी लगाने के साथ ही आसपास के परिसर को सुंदर सजाया गया। फव्वारों के बीच प्रभु की शृंगार प्रतिमा को देख भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। दर्शनों का क्रम डेढ़ से दो घंटे तक चला। मंदिर अधिकारी कैलाशचंद्र पुरोहित ने बताया कि इस अवसर पर प्रभु को महाप्रसाद का भोग लगाया गया। इस दौरान सैंकड़ों वैष्णवजनों ने प्रभु के दर्शन किए और जयकारे लगाए।