
Ropeway in Varanasi: एशिया के पहले अर्बन रोपवे की सौगात काशी वासियों को जल्द मिलने वाली है। सावन के मद्देनजर रोपवे का ट्रायल रोक दिया गया है। अब रक्षाबंधन के बाद इसका अंतिम ट्रायल किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक, रोपवे पर 148 गंडोला का लोड डालकर इसकी टेस्टिंग की जाएगी। इसके साथ ही टेक्निकल स्टेशन और अन्य स्टेशनों की भी जांच होनी है। बताया जा रहा है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में काशी वासियों को इस परियोजना की सौगात मिल जाएगी।
वाराणसी में रोपवे का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। गोदौलिया स्टेशन पर फ्लोरिंग का काम चल रहा है और लोहे की चादरों की वेल्डिंग की जा रही है। जिला प्रशासन के मुताबिक, फ्लोर टेस्टिंग के बाद 148 गंडोला का एक साथ ट्रायल किया जाना है, लेकिन सावन में काशी में आने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ की वजह से फिलहाल इसका ट्रायल रोक दिया गया है और रक्षाबंधन के बाद इसका अंतिम ट्रायल शुरू किया जाएगा। परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह प्रोजेक्ट शहर के सबसे व्यस्त कॉरिडोर पर यात्रियों को तेज और सुरक्षित परिवहन की सुविधा प्रदान करने के लिए विकसित किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि यूरोपियन स्टैंडर्ड के उपकरण लगाई जा रहे हैं और स्विट्जरलैंड के इंजीनियरों की देखरेख में पूरा कामकाज किया जा रहा है। सुरक्षा की जांच के लिए अलग से टीम तैयार की गई है। इस तरह के परियोजना की टेस्टिंग एक बार नहीं बल्कि तीन से चार बार की जाती है। वहीं, मंडलायुक्त एस राजलिंगम ने रोपवे परियोजना का निरीक्षण किया है और इस कार्य में तेजी लाने को कहा है। मण्डलायुक्त ने परियोजना का ट्रायल करके इसकी समीक्षा करने के लिए भी निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली प्रत्येक समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाए। अधिकारियों ने बताया है कि यह परियोजना जल्द से जल्द पूरी कर इसकी सौगात काशी वासियों को दी जाएगी।
बता दे कि भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की परियोजना के तहत एशिया का पहला अर्बन रुपए प्रोजेक्ट है, जिसकी सौगात काशी को दी जानी है। इस परियोजना के तहत 3.8 किलोमीटर की दूरी कर की जाएगी जो वाराणसी कैंट रेलवे स्टेशन को गोदौलिया से जोड़ेगा। बीच में काशी विद्यापीठ और रथयात्रा पर भी स्टेशन बनाए गए हैं। गिरजाघर एक टेक्निकल स्टेशन है। इस प्रकार कुल पांच स्टेशनों का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए 29 टावर बनाया जा रहे हैं। सरकार की तरफ से 815.58 करोड़ रुपए का बजट आवंटन किया गया है, जिसमें 15 साल का मेंटेनेंस भी शामिल है। इसके मॉनिटरिंग के लिए एक कंट्रोल रूम में स्थापित किया गया है और बिजली जाने के बाद जनरेटर से इसका संचालन किया जाएगा। बैकअप के तौर पर इंटरनल इलेक्ट्रिसिटी की भी व्यवस्था की गई है।