कहते है यदि कोई काम नेक नियत के साथ किया जाए तो अवश्य ही सफल होता है लेकिन आज के जमाने मे ये बातें शायद किताबी हो गयी है।
- डॉ शिल्पा जैन सुराणा
मुम्बई के अफ़रोज़ शाह और उनके साथियों ने 109 हफ़्तों से चल रहे सफाई अभियान को बंद कर दिया। स्वयंसेवकों के सहयोग से चल रहे इस अभियान का इस तरह से अंत वाकई दुखद है। वर्सोवा बीच की हालत अत्यंत दयनीय थी, कूड़े करकट से आता ये बीच सरकारी महकमे की पोल खोलता नजर आ रहा था, तब अफ़रोज़ ने ये बीड़ा उठाया कि वे इसकी दुर्दशा सुधारगे। अफ़रोज़ की लगन का ही असर था कि बड़े बड़े सेलेब्रिटीज़ भी इस मुहिम में शामिल हुए और अफ़रोज़ की ये पहल एक नई दिशा में जाती हुई साबित हुई।
कहते है यदि कोई काम नेक नियत के साथ किया जाए तो अवश्य ही सफल होता है लेकिन आज के जमाने मे ये बातें शायद किताबी हो गयी है। अफ़रोज़ को धमकियां मिली, उनके साथियों के साथ बदलसलूकी की गई, उन्हें गालियाँ दी गयी, शर्म की ये बात है कि एक इंसान जो जमीनी स्तर से जुड़े कार्य कर रहा था जहाँ उसका कोई निजी स्वार्थ नही था, उसे इस तरह की हरकतों का सामना करना पड़ा। आखिर अफ़रोज़ ने ये अभियान बन्द करने का निर्णय लिया और कहा कि वो हार गया। सवाल ये है कि ये हार किसकी है क्या ये वाकई अफ़रोज़ की हार है?
नही ये हार है हमारी, ये हार है इस सिस्टम की, ये हार है इस समाज की, इस प्रशासन की। क्यों हम इतने कायर हो गए है कि हम जहाँ आवाज़ उठानी होती है वहाँ चुप रहते है। ये इस देश की विडंबना ही कहलाएगी कि इस देश मे वास्तविक मुद्दे गौण हो गए है। करोड़ो अरबो रुपये खर्च कर के 'स्वच्छ भारत मिशन' चलाया जा रहा है फिर भी एक ऐसा व्यक्ति जो इस मिशन में जी तोड़ कोशिश के साथ लगा है, इस तरह का व्यवहार झेल रहा है। मीडिया को भी अपना सहयोग देना चाहिये, सिर्फ trp को अपना लक्ष्य न रखे, देश से जुड़े मुद्दों को भी प्राथमिकता दे। उम्मीद है कि इस बार अफ़रोज़ का साथ हम सब देंगें।