जब आप नए अवसरों और नजरियों को अपनाने से इंकार कर देती हैं तो आप खुद ही खुशियों को दूर कर देती हैं।
किसी काम को न करने के कई बहाने हम बनाते हैं लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये छोटे-छोटे बहाने आपकी जिंदगी और खुशियों को पूरी तरह से बर्बाद करने की ताकत रखते हैं। सोचिए और बहाने बनाना बंद कीजिए।
जब आप नए अवसरों और नजरियों को अपनाने से इंकार कर देती हैं तो आप खुद ही खुशियों को दूर कर देती हैं। दरअसल खुद को सुधारने का मौका ठुकरा कर आप खुद को आगे बढऩे से रोकती हैं और कई बहाने बनाकर झूठ भी बोलती हैं। इसी दौरान कहीं-न-कहीं आपका जेहन आपके डर और कोई काम सफलतापूर्वक और स्वतंत्र रूप से करने की नाकाबिलियत का आदी हो जाता है। आपको यह समझना होगा कि सभी तरह के नकारात्मक शब्द और बातें सच होने और आपको अपने सपनों से दूर करने की क्षमता रखती हैं। यह भी सही है कि खुद में बदलाव करना काफी मुश्किल है क्योंकि इसके लिए आत्मविश्वास के साथ-साथ स्पष्टता, प्रतिबद्धता और हिम्मत की जरूरत होती है। लेकिन अगर आप ऐसे बहाने बनाना छोड़ देंगी तो कोई ताकत आपको लक्ष्य से दूर नहीं कर पाएगी।
मुझे डर लगता है
आपको समझना होगा कि डर का कोई वजूद नहीं है। यह केवल मन का वहम है जो आपको सीमित और परेशान करता है। दिमाग पर काबू रखें और अपनी सोच को डरावनी तस्वीरें न बनाने दें। अगर आप अपने डर पर काबू नहीं कर पा रही हैं तो अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलिए और अपने डर का सामना कीजिए। मुश्किलों का सामना खुद कीजिए।
पर्याप्त समय, धन और अवसर नहीं है
लोग अक्सर पर्याप्त मात्रा में धन, समय और अवसर न होने की शिकायत करते देखे जाते हैं। एक औसत व्यक्ति के लिए ये पूर्णता का आधार होते हैं। अगर आप केवल अपनी समस्याओं के बारे में सोचेंगे तो आपके लिए सफल होना संभव नहीं है। अमीर और सफल लोग हमेशा सकारात्मक सोचते हैं और कुछ भी नया शुरू करने से डरते नहीं हैं क्योंकि उन्हें यकीन होता है कि उनके पास समय और संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
मैं ऐसी ही हूं
स्थिति चाहे जो हो कभी उन चीजों के बारे में न सोचें जिन्हें आप कर नहीं सकती। अगर आप संकोच छोड़ेंगी तो कई नए क्षेत्र देख सकेंगी जिनमें आप सफल हो सकती हैं। खुद को अपनी इच्छानुसार बदलने का मौका सभी के पास होता है बस जरूरत उस दिशा में सही मेहनत करने की होती है। मेहनत न कर पाने वाले तरह-तरह के बहाने बनाते हैं। इसलिए जरूरी है कि सपनों को पूरा करने के लिए सही आदतों और सोच को अपनाया जाए।
मैं तैयार नहीं हूं
समय पलक झपकते बीत जाता है। खुद को तैयार न मानने की अनिश्चितता और डर को दूर करके ही सफलता की ओर बढ़ा जा सकता है। बुद्धिजीवियों का भी मानना है कि हमें मृत्यु या दूसरी विपदाओं का नहीं, बल्कि जीवन में कुछ न करने का डर होना चाहिए। बदकिस्मती से कई बड़े अवसर आपके हाथ से सिर्फ इसलिए निकल जाते हैं क्योंॅॅॅॅॅॅॅकि आप कुछ करने की जिम्मेदारी लेने के लिए खुद को तैयार नहीं समझती हैं।
पता नहीं कैसे होता है
कोई भी नया काम शुरू करने से पहले बहुत से लोगों को यह डर सताता है कि हमने पहले इसे होते हुए नहीं देखा है। बहाना अच्छा है लेकिन आपको सफलता के संघर्ष में आपको धैर्य रखना होगा। बेकार के तर्क न देकर आपको एक इनोवेशन को अंजाम देने की ताकत जमा करनी होगी। हाथ पर हाथ रखकर बैठने से कहीं बेहतर हैं जीवन में कुछ नया और दिलचस्प आजमाते रहना।