आज जरूरत स्मार्ट वर्क करने की है। इससे आप दिन में एक या दो अतिरिक्त घंटे जोडक़र अपने लिए समय निकाल सकती हैं।
आज जरूरत स्मार्ट वर्क करने की है। इससे आप दिन में एक या दो अतिरिक्त घंटे जोडक़र अपने लिए समय निकाल सकती हैं। ऑफिस में समय बर्बाद करने से बुरा और कुछ नहीं है। आपकी उत्पादकता आपके जॉब परफॉर्मेंस को सीधे तौर पर प्रभावित करती है, खासतौर से जब सालाना समीक्षा और वेतन वृद्धि की बात हो। जब बात कार्यकुशलता और प्रभावितता की आती है तो ज्यादातर लोग यह भूल जाते हैं कि प्रभावशाली बनने की कला सीखे बिना आप कार्यकुशल नहीं हो सकते यानी तेजी से काम कर पाना सफलता की गारंटी नहीं है।
सबसे पहले उठना
सुबह 5 बजे उठकर 7 बजे तक बिना रुके काम करके आप उतना काम पूरा कर सकती हैं, जितना दिन के आठ घंटे में करती हैं। सुबह के इस समय में जब सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद होते हैं और काम में विघ्न डालने वाला भी कोई नहीं होता, आप काम एकाग्रता के साथ जल्दी से पूरे कर पाती हैं। तो अलार्म को बंद करने की बजाय सुबह के कुछ घंटों का फायदा उठाएं।
अगले दिन का प्लान पहले से
हर दिन बोनस में कुछ वक्त पाने के लिए अपने अगले दिन के काम की प्लानिंग रात को करना एक बेहतरीन तरीका है। इससे आप नए दिन की शुरुआत कंफ्यूजन के साथ नहीं, बल्कि एक स्पष्टता के साथ कर पाएंगी क्योंकि आपको पता रहेगा कि आपको सारे दिन क्या करना है। प्लानिंग पर बिताया एक मिनट कार्य करने में तीन मिनट की बचत करता है। प्लानिंग में 30 मिनट से ज्यादा का समय नहीं लगता लेकिन यह आपके 90 मिनट बचा लेती है। यह कहने की जरूरत नहीं कि इससे आप तनाव को भी कम कर लेंगी।
तयशुदा काम ही करें
एक मंसूबा बांध लें कि जो काम तय हैं, वही करेंगी और जो तयशुदा नहीं हैं, उन्हें नहीं करेंगी। दरअसल अचानक से आए काम ही सारे शेड्यूल गड़बड़ाते हैं। जैसे अगर आप रोज वर्कआउट करना चाहती हैं तो उसका शेड्यूल तय करें और उसकी पालना करें। ऐसा भी न तो कि आपने वर्कआउट करना तो तय कर लिया लेकिन उसे कभी सुबह पर तो कभी शाम पर टालती हों। शेड्यूल की पालना करने से आप समय बर्बाद करने वाले तत्वों को दूर करने में सफल होंगी। यहां अपने आधे टाइम का शेड्यूल करना और बाकी समय को अनेपक्षित लेकिन संभावित घटनाओं के लिए रखना अच्छा आइडिया होगा।
बड़े प्रोजेक्ट के छोटे टुकड़े करें
बड़े प्रोजेक्ट्स को कम वक्त में पूरा करना देरी का कारण बनता है। ऐसे में प्रोजेक्ट को कुछ चरणों में बांट लें, मसलन अगर आपका सप्ताह के अंत में प्रेजेंटेशन है तो आप उस प्रेजेंटेशन को एक सिटिंग में पूरा करने की सोचती हैं। यही काम आप रोजाना 15 मिनट की सिटिंग में करें, बिना किसी परेशानी और तनाव के पूरा होगा। हर सिटिंग में किए जाने वाले काम की प्लानिंग पहले ही दिन से कर लें।
काम का माहौल बाधारहित हो
काम के दौरान आपने ऐसा जरूर महसूस किया होगा कि जिस वक्त आप सबसे ज्यादा मसरूफ होती हैं आपके परिवार से या दोस्तों से तभी ईमेल या टेक्स्ट मैसेज आते हैं। काम में इस तरह की रुकावटों से निपटने के लिए एक समय तय करें, जब इन मैसेजेज का जवाब दें। दिन में दो बार 30 मिनट का समय इसके लिए निकालें। यहां आपको जरूरी और बेहद जरूरी मैसेज को दूसरे मैसेज से अलग रखना होगा।
व्यवस्थित रहने की चिंता नहीं
अगर आप भी काम शुरू करने से पहले व्यवस्थित होने की चिंता करती हैं तो ऐसा करना छोड़ दें। अगर आपकी डेस्क फैली हुई है तो उसे वैसी ही रहने दें। याद रखें कि आपको जो वेतन मिलता है, वह आपके जॉब के लिए मिलता है व्यवस्थित रहने के लिए नहीं। जब तक व्यवस्थित न रहने से आपका काम प्रभावित नहीं होता है तब तक इसकी चिंता न करें। आखिरकार अस्त-व्यस्त डेस्क का मतलब अस्त-व्यस्त माइंड बिल्कुल नहीं होता।