सऊदी अरब को दुनिया में उन देशों में माना जाता है जहां पर महिलाओं पर अभी भी सदियों पुरानी कड़े नियम, रूढ़िवादिता व सख्त कानून लागू है।
महिलाएं जो हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है जो किसी भी विषय में पुरुषों से कम नहीं है। महिलाएं जो पहले घर आंगन में ही काम करती थी अब भी समाज में कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है। एक और जहां महिलाओं के प्रयास से सामाजिक बदलाव साफ दिख रहा है कि महिला समाज को आईना दिखा रही है कि वे किसी से कम नहीं है इसका हाल ही का उदाहरण सऊदी अरब की महिलाएं हैं।
सऊदी अरब को दुनिया में उन देशों में माना जाता है जहां पर महिलाओं पर अभी भी सदियों पुरानी कड़े नियम, रूढ़िवादिता व सख्त कानून लागू है। सऊदी अरब में महिलाएं फिर भी हर बार अपने हक की लड़ाई लड़ कर आगे बढ़ी है। सऊदी अरब में 24 जून 2018 को पहली बार महिलाओं को वाहन चलाने का अधिकार मिला है सरकार ने दशको से लगे वाहन प्रतिबंध को हटा लिया।
यह दिन सऊदी अरब कि महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन था क्योंकि उनका 28 साल का संघर्ष आखिरकार सफल हो गया। जहां सऊदी अरब में हर चीज के लिए वहां की महिलाओं ने कड़ा संघर्ष किया है चाहे वह 1955 में स्कूल में दाखिला, 2001 में पहचान पत्र ,व 2005 में जबरन विवाह पर प्रतिबंध। महिलाओं ने हर बार साबित किया है कि वे किसी से कम नहीं है और अपने हक की लड़ाई खुद लड़ सकती है।
आज 21वी सदी में महिलाएं हर बार रूढ़िवादी परंपराओं को तोड़ कर आगे बढ़ रही है। प्रशासन जहां महिला ड्राइवरों के लिए विशेष व्यवस्था करने में जुटा हुआ है, वहीं पुलिस भी कानून व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए महिलाओं को यातायात के नियम सिखाने की कोशिश में हैं। महिला ड्राइवरों की कार पार्किंग के लिए खास गुलाबी रंग के पार्किंग स्थल बनाए हैं। यह भी ध्यान रखा गया है कि महिलाओं के लिए पार्किंग स्थल प्रवेश और निकास द्वार के पास ही हों। एक अनुमान के मुताबिक साल 2020 तक सऊदी अरब में 30 लाख से ज्यादा महिलाएं ड्राइवर होंगी।
सऊदी अरब दुनिया का एकलौता देश था जहां महिलाओं के गाड़ी चलाने पर पाबंदी थी। इस देश में पिछले 60 से ज्यादा सालों तक महिलाओंं को सिर्फ पीछे की सीट पर देखा जा सकता था। सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने का अधिकार क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 से मुमकिन हो पाया है। क्राउन प्रिंस ने पिछले साल सितंबर में महिलाओं के गाड़ी चलाने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का ऐलान किया था और रविवार से इसे लागू आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया।
- शिवानी त्यागी