
Bangladesh Extremist Group: बांग्लादेश में 'इत्तिहादुल उम्माह' (Ittihadul Ummah) नाम का एक नया उग्रवादी गुट सामने आया है। हाल ही में तेजगांव कॉलेज की मस्जिद से हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ के बाद, खुफिया एजेंसियां इस गुट के विदेशी उग्रवादी संगठनों से संभावित संबंधों की जांच कर रही हैं।
मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से बांग्लादेश में धार्मिक कट्टरवाद और उग्रवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2024 के विद्रोह के बाद से कई उग्रवादी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचीबद्ध तीन चरमपंथी नेता, जो जेल से भाग गए थे, अभी भी फरार हैं।
'डेली सन' ने बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद के हवाले से बताया कि, "तेजगांव में हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल फोन के फोरेंसिक विश्लेषण और उनसे की गई पूछताछ से हमें 'इत्तिहादुल उम्माह' नाम का एक संगठन बनाने की योजनाओं के बारे में जानकारी मिली है। इन पर 'खिलाफत' (Caliphate) स्थापित करने के उद्देश्य से चरमपंथी गतिविधियों को अंजाम देने का आरोप है।"
रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस ने हाल ही में ढाका के तेजगांव कॉलेज की एक मस्जिद से 23 लोगों को हिरासत में लिया है। इन पर प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से जुड़े होने का संदेह है। पुलिस सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि खुफिया जानकारी के आधार पर एक गुप्त बैठक के दौरान ये गिरफ्तारियां की गईं।
'डेली सन' ने लिखा है, कट्टरपंथियों के संरक्षण में बांग्लादेश में उग्रवादी गतिविधियां बढ़ रही हैं। इसके अलावा, धार्मिक भावनाओं का फायदा उठाकर और पर्दे के पीछे से विदेशी समर्थन पाकर, बांग्लादेश की चुनी हुई सरकार को हटाकर देश को अस्थिर करने की एक गहरी साजिश रची जा रही है।
दक्षिण एशियाई देश में बढ़ते उग्रवाद को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। अब इसका खतरा बांग्लादेश वायु सेना तक भी पहुंच गया है। इस साल की शुरुआत में चटगांव के एक बेस से लापता हुए एक वारंट ऑफिसर का पता प्रतिबंधित संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) के एक ठिकाने पर चला है।
इससे पहले अगस्त में, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दी थी कि 'अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट' (AQIS) बांग्लादेश का इस्तेमाल आतंकी सेल बनाने के लिए एक बेस के तौर पर करने की कोशिश कर रहा है। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र की 'एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शंस मॉनिटरिंग टीम' की 38वीं रिपोर्ट में सामने आई है। यह रिपोर्ट सुरक्षा परिषद की उस समिति को सौंपी गई थी जो इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उनसे जुड़े समूहों के मामलों को देखती है।