
खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल पर उठे गंभीर सवाल, Photo Source@IANS
Khyber Pakhtunkhwa Emergency: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू करने और तख्तापलट से, पाकिस्तान की नागरिक सरकार और सेना के बीच संबंधों पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस प्रांत में लंबे समय तक पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की सरकार रही है।
'ईयू टुडे' (EU Today) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि, पाकिस्तान में एक पुरानी कहावत है कि ज्यादातर देशों के पास अपनी सेना होती है, लेकिन पाकिस्तान में सेना के पास अपना देश है। यह एक तीखी टिप्पणी जरूर है, लेकिन इसने कई सरकारों के बदलने, संवैधानिक संकटों और सैन्य हस्तक्षेपों के बावजूद अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी है। खैबर पख्तूनख्वा में हाल ही में हुए घटनाक्रम जो पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) द्वारा शासित उत्तर-पश्चिमी प्रांत है- यह बताते हैं कि यह कहावत आज भी उतनी ही सटीक है जितनी पहले थी।"
पीटीआई के प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर शासन लागू करने के पाकिस्तान सरकार के फैसले की निंदा की और इसे "आपातकाल की आड़ में किया गया तख्तापलट" करार दिया।
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक गढ़ों में से एक है। इमरान खान की जेल और पाकिस्तान के राजनीतिक तंत्र के साथ उनके टकराव ने देश में काफी अशांति पैदा कर दी है। ऐसे हालात में एक चुनी हुई प्रांतीय सरकार को हटाना, इस संदेह को जन्म देता है कि कहीं 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए एक सुविधाजनक हथियार के रूप में तो नहीं किया जा रहा है।
सार्वजनिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि सेना ने सीधे तौर पर सत्ता पर कब्जा करने का आदेश दिया था। सेना की संलिप्तता के आरोपों को पहले से साबित तथ्य मानने के बजाय, इनकी जांच की जानी चाहिए। फिर भी, तख्तापलट का मतलब हमेशा यही नहीं होता कि सैनिक किसी प्रधानमंत्री को सत्ता से हटा दें। लोकतांत्रिक संस्थाओं को उन फैसलों के जरिए भी धीरे-धीरे खोखला किया जा सकता है, जो देखने में तो कानूनी लगते हैं, लेकिन असल में सारी ताकत एक जगह केंद्रित कर देते हैं और विपक्षी दलों को उनके वास्तविक अधिकारों से वंचित कर देते हैं।"
Updated on:
15 Oct 2026 08:49 pm
Published on:
15 Oct 2026 08:49 pm
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