
Indian Diaspora in UK: ब्रिटेन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और उसके विरोध में जवाबी प्रदर्शन हो रहे हैं। 'स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया-यूके' (SFI-UK) और अन्य समर्थक लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग और पार्लियामेंट स्क्वायर के बाहर एकत्रित हुए। इन प्रदर्शनकारियों ने भारत में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंने 'आजादी' और चुनावी पारदर्शिता के नारे लगाए।
इसके जवाब में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय और भारतीय सरकार/प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक वहां पहुंचे। इन लोगों ने 'भारत माता की जय' और 'मोदी, मोदी' के नारे लगाकर और प्रधानमंत्री का कट-आउट लहराकर जवाबी विरोध-प्रदर्शन किया। दोनों ही समूहों को आमने-सामने आने से रोकने के लिए मेट्रोपॉलिटन पुलिस (Metropolitan Police) को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी।
शनिवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में प्रदर्शनकारियों की एक ऐसी भीड़ जमा हुई, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और 'कॉकरोच जनता पार्टी' के समर्थन और विरोध को लेकर दो गुटों में बंटी हुई थी।
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब भारत में कांग्रेस के नेतृत्व वाले 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की अगुवाई में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में मुख्य रूप से भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
प्रदर्शनों की गूंज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुई, क्योंकि लंदन में प्रवासी भारतीयों के सदस्यों ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में जवाबी विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें भारतीय उच्चायोग के बाहर कांग्रेस समर्थित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) और अन्य समान विचारधारा वाले समूहों के विरोध प्रदर्शन का विरोध किया गया।
इन घटनाओं के बाद, 'कॉकरोच जनता पार्टी' की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने शनिवार को पार्टी संस्थापक अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी की वैधता को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में मौलिक अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया का गंभीर उल्लंघन हुआ है।
'X' (ट्विटर) पर एक पोस्ट में, सिंह ने सवाल उठाया कि नागरिकों को एक शांतिपूर्ण राष्ट्रीय प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहना अपराध कैसे हो सकता है। उन्होंने लिखा, "SEM कोर्ट को अभिजीत दिपके को रिहा कर देना चाहिए, क्योंकि उनकी गिरफ्तारी गैर-कानूनी है। उन्होंने बस लोगों से तिरंगा फहराने की अपील की थी- क्या यह अपने आप में कोई अपराध हो सकता है?"
सिंह ने उनकी गिरफ्तारी के तरीके पर भी गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा, "जिस तरह से उन्हें उनके घर के ठीक बाहर से उठाया गया, उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई, और उनके वकीलों को भी उनसे मिलने नहीं दिया गया — ये बातें कानूनी प्रक्रिया और मौलिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।