
Iran Inflation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से लाखों बैरल तेल गुजरा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि ईरान के तेल मंत्री ने इसलिए इस्तीफा दे दिया क्योंकि देश की कोई अर्थव्यवस्था नहीं बची है और कोई तेल नहीं है।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि ईरान की हालत बहुत खराब है और उनकी अर्थव्यवस्था खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वहां महंगाई लगभग 300 प्रतिशत है और उनके तेल मंत्री ने अभी-अभी इस्तीफा दिया है। ट्रंप के अनुसार मंत्री ने कहा,हमारी कोई अर्थव्यवस्था नहीं है। हमारे पास कोई तेल नहीं है। हमारे पास कुछ भी नहीं है।
ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल का प्रवाह उस स्तर तक पहुंच गया है जो पश्चिम एशिया में संघर्ष से पहले देखा गया था, और कभी-कभी तो उससे भी अधिक रहा है। उन्होंने कहा कि, होर्मुज जलडमरूमध्य से पिछले कुछ दिनों में भारी मात्रा में लाखों बैरल तेल की आपूर्ति हुई है। हम इसे ऐसे स्तरों पर पहुंचा रहे हैं जो युद्ध से पहले के स्तर के बराबर या कभी-कभी उससे भी अधिक हैं। और हमने बहुत अच्छा काम किया है।
ईरान के तेल मंत्री के बारे में ट्रंप की टिप्पणी तब आई जब ईरानी सरकारी मीडिया 'प्रेस टीवी' ने खबर दी कि तेल मंत्री मोहसेन पाकनेजाद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सरकारी कंपनी 'नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी' (NIOC) के सीईओ हामिद बोवार्ड को संसद द्वारा नए मंत्री को मंजूरी दिए जाने तक मंत्रालय का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया गया है।
रविवार को जारी और ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पाकनेजाद का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और बोवार्ड को कार्यवाहक तेल मंत्री नियुक्त किया।
पाकनेजाद के इस्तीफे का कोई कारण नहीं बताया गया। हालांकि प्रेस टीवी ने बताया कि स्थानीय मीडिया की पिछली रिपोर्टों में संकेत दिया गया था कि ईरानी राष्ट्रपति के साथ मतभेदों के कारण वह इस्तीफा दे सकते हैं।
प्रेस टीवी की अन्य रिपोर्टों में ईरान की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल कंपनी, PGPIC में पाकनेजाद के बढ़ते दखल का जिक्र किया गया। कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि पेज़ेशकियन उस तरीके से नाखुश थे जिससे पाकनेजाद ने 'ट्रस्टीज़' (तेल व्यापारियों का एक नेटवर्क) के मामले को संभाला था। ये व्यापारी 10 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा के ईरानी तेल निर्यात का पैसा वापस करने में नाकाम रहे हैं।