
India China Relations: विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने स्पष्ट कहा कि भारत के साथ सामान्य संबंध बनाए रखने के लिए चीन को सीमा पर शांति और स्थिरता सुनिश्चित करनी होगी। सीमा पर शांति भंग होने का असर दोनों देशों के संबंधों पर पड़ेगा। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं है और यह मुद्दा कई दशकों से बना हुआ है। 1975 से 2020 तक सीमा पर किसी सैनिक की जान नहीं गई थी। इस दौरान दोनों देशों के संबंध भी आगे बढ़े।
जयशंकर ने कहा कि 2020 में कोरोना महामारी के दौरान सीमा पर कई घटनाएं हुईं। इनका अंत दोनों देशों के सैनिकों के बीच ऐसे संघर्ष में हुआ, जिसमें दोनों पक्षों के सैनिक मारे गए। यह 1975 के बाद की स्थिति से बड़ा बदलाव था। सीमा पर शांति बहाल करने के लिए चार साल तक बातचीत करनी पड़ी। इसका असर अगले पांच वर्षों तक दोनों देशों के संबंधों पर दिखा। उन्होंने कहा कि 2024 से सीमा पर हालात काफी हद तक सुधरे हैं और इसके साथ ही दोनों देशों के संबंध भी सामान्य हो रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं है और यह मुद्दा कई दशकों से बना हुआ है। उन्होंने याद दिलाया कि 1975 से 2020 तक सीमा पर किसी सैनिक की जान नहीं गई थी। इस पूरे दौर में दोनों देशों के संबंध भी आगे बढ़ते रहे।
जयशंकर ने कहा कि चीन के साथ आर्थिक संबंधों में भी गंभीर समस्याएं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार का संतुलन चीन के पक्ष में है। कई क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को चीन के बाजार में पर्याप्त पहुंच नहीं मिली और वे वहां सफलतापूर्वक कारोबार नहीं कर पाईं। इसके विपरीत, भारत ने चीनी कंपनियों को समान अवसर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवेश, बाजार तक पहुंच और कारोबारी नीतियों से जुड़े फैसले सीमा विवाद से अलग होंगे। भारत कारोबार के लिए सीमा विवाद का पूरी तरह समाधान होने की शर्त नहीं रख रहा, लेकिन सीमा पर शांति बनाए रखना जरूरी है।