Protest: जापान के फुजिसावा में शिंटो मंदिर के पास बन रही विशाल मस्जिद के खिलाफ हजारों स्थानीय लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने इलाके में कोई मस्जिद या मुस्लिम कब्रिस्तान नहीं चाहते।
Fujisawa: जापान के फुजीसावा शहर में इन दिनों एक बड़े विवाद ने जन्म ले लिया है और वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। दरअसल, कनागावा प्रान्त के इस शांत शहर में पहली बार एक विशाल मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है, जिसका हजारों स्थानीय नागरिक पुरजोर विरोध कर रहे हैं। विवाद की मुख्य जड़ इस प्रस्तावित मस्जिद की लोकेशन और इसका विशाल आकार है। यह मस्जिद प्राचीन और पवित्र 'समुकावा शिंटो मंदिर' के एकदम पास में बनाई जा रही है। बता दें कि यह शिंटो मंदिर जापानी संस्कृति में बेहद अहम स्थान रखता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ऐतिहासिक मंदिर के पास जानबूझकर इतनी बड़ी मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है, जिसे वे अपनी आस्था और संस्कृति के खिलाफ एक सीधे उकसावे की कार्रवाई के रूप में देख रहे हैं। इस विवादित निर्माण को रुकवाने के लिए सप्ताहांत में हजारों की संख्या में लोग बैनर-पोस्टर लेकर सड़कों पर उतर आए और भारी नारेबाजी की।
सड़कों पर उतरे जापानी प्रदर्शनकारियों के बयानों में भारी गुस्सा और हताशा साफ झलक रही है। विरोध कर रहे कई स्थानीय नागरिकों ने खुले तौर पर चेतावनी देते हुए कहा है, "हम यहां अपने इलाके में एक भी मस्जिद या मुस्लिम कब्रिस्तान बिल्कुल नहीं चाहते हैं।" आम लोगों का मानना है कि यह उनके शांतिपूर्ण और पारंपरिक जीवनशैली को खतरे में डालने वाली बात है। वहीं दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समुदाय के पैरोकारों का कहना है कि इस तरह के उग्र प्रदर्शनों के जरिए जापान जैसे शांत देश और दुनियाभर में जानबूझकर इस्लाम के खिलाफ नफरत का माहौल बनाया जा रहा है। उनका तर्क है कि धार्मिक स्वतंत्रता हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है।
इस मुद्दे के लगातार तूल पकड़ने और विरोध प्रदर्शनों के उग्र होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। मस्जिद के समर्थकों और विरोधियों के बीच तनाव इतना बढ़ गया है कि सुरक्षाबलों को कई बार बीच-बचाव करना पड़ा है। स्थानीय प्रशासन और जापानी सरकार फिलहाल शांति बनाए रखने की अपील कर रही है और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं। यदि जल्द ही कोई कानूनी या प्रशासनिक हल नहीं निकाला गया, तो यह मामला जापानी संसद और उच्च न्यायालयों तक पहुंच सकता है। फिलहाल, निर्माण स्थल और शिंटो मंदिर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
इस पूरे विवाद के पीछे का एक बड़ा साइड एंगल जापान की तेजी से बदलती डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) है। पिछले 20 सालों में जापान में मुस्लिम आबादी में लगभग चार गुना वृद्धि हुई है। घटती जन्म दर और वर्कफोर्स की भारी कमी के कारण जापान ने हाल के वर्षों में बाहरी कामगारों और अप्रवासियों के लिए अपने दरवाजे खोले हैं। लेकिन, एक ऐसा देश जो अपनी सजातीय संस्कृति और शिंटो-बौद्ध मान्यताओं के लिए दुनियाभर में जाना जाता है, वहां अचानक से नई विदेशी संस्कृतियों का प्रवेश स्थानीय लोगों के मन में सांस्कृतिक असुरक्षा पैदा कर रहा है। फुजिसावा का यह विवाद महज ईंट-पत्थर की एक इमारत का नहीं है, बल्कि यह जापान के पारंपरिक मूल्यों और एक नए बहुसांस्कृतिक समाज में ढलने की चुनौती के बीच का सीधा टकराव है।