
Hypersonic Missile Test North Korea: कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। पिछले महीने सीमा पर लगे लैंडमाइन विस्फोट में दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हुए थे। इसके बाद सियोल ने इस हमले के लिए उत्तर कोरिया को जिम्मेदार ठहराया था।
हालांकि, उत्तर कोरिया ने इस दावे को पूरी तरह से नकार दिया। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने शुक्रवार को कड़े शब्दों में कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं और उन्होंने जानबूझकर कोई बारूद नहीं बिछाया।
इसी तनाव भरे माहौल में शनिवार को उत्तर कोरिया ने एक और बड़ा मिसाइल परीक्षण किया। राज्य मीडिया केसीएनए ने रविवार को बताया कि यह परीक्षण खुद किम जोंग उन की मौजूदगी में हुआ।
मिसाइल पूर्वी इलाके से दागी गई और समुद्र में करीब एक हजार किलोमीटर दूर लक्ष्य पर जा गिरी। बता दें कि एक दिन पहले भी उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की ओर 700 किलोमीटर की रेंज वाली मिसाइल दागी थी, जिसके बाद सीमा पर तनाव बढ़ गया था।
केसीएनए के मुताबिक, इस ड्रिल का मकसद हाइपरसोनिक रणनीतिक हथियार सिस्टम चलाने वाले सैनिकों को ट्रेनिंग देना था। साथ ही हथियार की भरोसेमंदता, क्षमता और तेजी से कहीं भी पहुंचाने की ताकत को परखना था।
परीक्षण के दौरान किम जोंग उन ने कहा कि दुश्मनों को हमारी रणनीतिक हथियारों की ताकत और खतरा साफ दिखना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि परमाणु ताकत बनाए रखना देश की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
वहीं, किम यो जोंग ने पहले ही दिन दावा किया था कि दक्षिण कोरिया और जापान इस मिसाइल को ट्रैक नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि खास वेव जैसी उड़ान शैली ने उनकी निगरानी क्षमता की कमजोरी उजागर कर दी।
वहीं दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि उन्होंने बैलिस्टिक मिसाइल का पता लगा लिया था और यह पूर्वी समुद्र की तरफ सात सौ किलोमीटर से ज्यादा उड़ी थी।
यह परीक्षण इस साल उत्तर कोरिया के दस से ज्यादा मिसाइल परीक्षणों में शामिल है। हर बार नई क्षमता दिखाने की कोशिश की जा रही है। लैंडमाइन विवाद के बाद यह लॉन्च क्षेत्र में तनाव और बढ़ाने वाला साबित हुआ है।
दक्षिण कोरिया लगातार आरोप लगा रहा है कि उत्तर कोरिया सीमा पर खतरनाक कदम उठा रहा है जबकि प्योंगयांग इसे अपना बचाव बता रहा है।
किम जोंग उन का संदेश साफ है कि वे अपनी ताकत बढ़ाने से पीछे नहीं हटेंगे। दोनों कोरिया के बीच बातचीत के रास्ते फिलहाल बंद नजर आ रहे हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चिंता बढ़ रही है।