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Nepal Flash Flood: जिप लाइन बनी सहारा, त्रिशूली में मोनेस्ट्री में लापता लोगों के लिए प्रार्थना

Nepal Flash Flood 2026: नेपाल के त्रिशूली में बाढ़ से पुल बहने के बाद अस्थायी जिप लाइन बनी लाइफलाइन। रसुवा में मोनेस्ट्री में लापता लोगों के लिए प्रार्थना, अब तक 1,114 शव बरामद, 3,900 से अधिक लोग लापता।
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Sep 03, 2026
Nepal glacier avalanche 2026
नेपाल में बाढ़ ने तबाही मचाई (Photo-IANS)

Nepal Flood 2026:नेपाल के त्रिशूली में आई भीषण बाढ़ के बाद पुलों के बहने से कई इलाकों का संपर्क टूट गया था। ऐसे में स्थानीय समुदायों ने एक अस्थायी जिप लाइन बनाकर आवाजाही फिर से शुरू की। इस जिप लाइन को संचालित करने में नेपाल पुलिस के जवान लगे हुए हैं।
बाढ़ से पहले सड़क और पुल पूरी तरह नष्ट हो जाने के बाद यह जिप लाइन नदी के दोनों किनारों पर फंसे लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा बन गई है।

स्थानीय निवासी मुहम्मद अमीर हक ने बताया कि वह 26 अगस्त से बाढ़ आने के बाद नदी के उस पार फंसे हुए थे। उन्होंने जिप लाइन से नदी पार करने के बाद बताया कि शुरुआत में डर लगा, लेकिन फिर भी हिम्मत करके उन्होंने नदी पार की। 26 अगस्त को आई बाढ़ की घटना को याद करते हुए हक ने बताया कि उस समय पूरा संपर्क टूट गया था और तेज बहते पानी के कारण लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी की सेहत ठीक नहीं थी, जिस कारण वह उनके साथ यात्रा नहीं कर सकीं, लेकिन बाद में हेलीकॉप्टर के जरिए उन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया। हक ने कहा कि उनकी पत्नी के लिए हेलीपैड की व्यवस्था की गई और अब वह सुरक्षित हैं। हक इस इलाके में अपना व्यापार चलाते थे और बाढ़ के बाद संपर्क टूटने के कारण वह अपने परिवार के साथ वहीं फंस गए थे। अब यह अस्थायी जिप लाइन नदी पार करने का एक प्रमुख साधन बन गई है, जिसे नेपाल पुलिस के जवान संचालित कर स्थानीय लोगों की मदद कर रहे हैं।

मोनेस्ट्री में लापता लोगों के लिए प्रार्थना

इसी बीच, नेपाल के त्रिशूली स्थित एक मोनेस्ट्री में एक बेहद भावुक दृश्य देखने को मिला। जहां परिवार और स्थानीय लोग उन अपनों के लिए प्रार्थना और अंतिम संस्कार जैसे कर्मकांड कर रहे हैं। मोनेस्ट्री में भी लोगों की भारी भीड़ है। वह सभी उन लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करने पहुंचे, जो बाढ़ आने के बाद से लापता हैं।

कई लोग घर के साथ ही बह गए

रसुवा के निवासी तिशुंग घाले ने बताया कि उनके इलाके के कई लोग अपने घरों के साथ ही बह गए और सात दिन बाद भी उनका कोई पता नहीं चला है। उन्होंने कहा कि उनके अपने विस्तृत परिवार के भी कई सदस्य भी लापता हैं। मीडिया समूह ANI से बात करते हुए घाले ने कहा कि ये वे लोग हैं जो पहाड़ों से बह गए थे। सात दिन बाद भी उनसे कोई संपर्क नहीं हो पाया है, इसलिए वह उनके नाम पर प्रार्थना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस छोटी सी प्रार्थना के जरिए वह उम्मीद कर रहे हैं कि यदि उनके परिवारजनों की मृत्यु हो गई है, तो उनकी आत्माओं को शांति मिले। उन्होंने कहा कि इन लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा, क्योंकि वे अपने घरों में ही थे और घरों के साथ ही बह गए।

परिस्थिति को शब्दों में नहीं बताया जा सकता है

घाले ने भावुक होकर बताया कि यह स्थिति शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उनका खुद का परिवार सुरक्षित है, लेकिन उनके कई रिश्तेदार बाढ़ में बह गए। उन्होंने बताया कि जहां वे रहते थे, वहां से लगभग 42 लोग निकाले गए, जबकि उनके पूरे क्षेत्र में 400 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने बताया कि उनकी अपनी बड़ी और छोटी बहन तथा उनका परिवार भी इसमें शामिल हैं—छोटी बहन का पूरा परिवार बह गया, जबकि बड़ी बहन की एक छोटी बेटी यानी उनकी भांजी और एक अन्य बहन का परिवार भी इसका शिकार हुआ। इसके अलावा उनकी बड़ी मौसी और मौसी की बहन समेत तीन लोग भी बह गए। इस तरह परिवार-दर-परिवार मिलाकर कुल 42 लोग उनके अपने परिचितों में से लापता या मृत हो गए हैं।

बाढ़ चीन की ओर से आए पानी के कारण आई

एक अन्य स्थानीय निवासी बोम बहादुर तमांग ने बताया कि यह बाढ़ चीन की ओर से आए पानी के कारण आई, जिसने कई बसावटों को बहा दिया। उन्होंने कहा कि मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करना बौद्ध धर्म की एक परंपरा है। तमांग ने एएनआई को बताया कि पहली बार चीन की तरफ से इस तरह की बाढ़ आई, जिसमें यहां की सभी बसावटें बह गईं। इसलिए जिन लोगों की मृत्यु हुई, उनकी आत्मा की शांति के लिए सभी लोग इस गुम्बा में इकट्ठा हुए हैं, जो बौद्ध धर्म में एक पुरानी परंपरा है।

इसी बीच, नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ से भारी तबाही हुई है। नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) के अनुसार, अब तक 1,114 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 3,900 लोगों से अब भी कोई संपर्क नहीं हो पाया है। अधिकारियों ने बताया कि राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है और अब तक 11,993 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।

Updated on:
03 Sept 2026 03:55 pm
Published on:
03 Sept 2026 03:55 pm