बिहार के समस्तीपुर में हाल ही में पकड़ौआ विवाह का मामला सामने आया, जहां युवती के परिवार ने युवक को अगवा कर जबरन शादी करवा दी।
Pakadua Marriage in Bihar: बिहार के समस्तीपुर में हाल ही में पकड़ौआ विवाह का मामला सामने आया, जहां युवती के परिवार ने युवक को अगवा कर जबरन शादी करवा दी। युवक के पिता ने पुलिस की मदद से बेटे को छुड़ाया। बिहार और पूर्वी यूपी में दशकों से चल रही इस कुप्रथा को समझते हैं।
यह एक कुप्रथा है जिसमें शादी योग्य लड़के का अपहरण कर जबरन शादी करा दी जाती है। न लड़के की सहमति, न लड़की की। 1970 के दशक में शुरू हुई यह प्रथा 1980-90 में चरम पर पहुंची। बेगूसराय से शुरू होकर पटना, नवादा, मुंगेर तक फैली। गिरोह कॉन्ट्रैक्ट पर अपहरण करते थे।
पहले टारगेट चुना जाता है; देखा जाता है कि लड़का सरकारी नौकरी वाला, पढ़ा-लिखा या संपन्न हो। बंदूक की नोक पर अपहरण किया जाता है। लड़के को बंधक बनाकर मंडप में बिठाया जाता है; कई बार कमर में रस्सी बांधकर भी रोका जाता है। जबरन सिंदूरदान और फेरे करवाए जाते हैं। मारपीट और धमकी तो आम है।
दहेज प्रथा इसका कारण है। बिहार में योग्य दूल्हों की मांग 25 लाख रुपये तक पहुंचती है, जबकि प्रति व्यक्ति आय बहुत कम है। गरीब परिवार दहेज नहीं दे पाते, इसलिए 'पकड़ लो' का रास्ता अपनाते हैं। लड़कियों की अशिक्षा और सामाजिक दबाव भी एक कारण हैं।
यह आईपीसी की धारा 366 (अपहरण) और 506 (धमकी) के तहत अपराध है। हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 5 और 12 के अनुसार बिना सहमति का विवाह अमान्य है। पटना हाईकोर्ट ने नवंबर 2023 में 10 साल पुराना पकड़ौआ विवाह रद्द किया था।
सामाजिक दबाव से 90 प्रतिशत मामलों में रिश्ता बना रहता है लेकिन डर और मजबूरी से, खुशी से नहीं। कई रिश्तों में नफरत और मानसिक प्रताड़ना रहती है।