Climate Change: इस योजना से 16 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को बचाया जा सकेगा, जो अमरीका के आकार का लगभग पांचवां हिस्सा है। इतने क्षेत्रफल मेें फैले विश्व के 16, 825 स्थलों पर मौजूद दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों का निवास है।
Climate Change: दुनिया 2030 तक पृथ्वी की 30 फीसदी भूमि को संरक्षित करने के लक्ष्य को लेकर चल रही है, ताकि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और लुप्त होते जीवों को बचाया जा सके। लेकिन अब अमरीकी संरक्षण समूह रिजॉल्व के शोधकर्ताओं ने कहा है, पृथ्वी (Earth) के महज 1.2 फीसदी हिस्से को संरक्षित कर हम जैव विविधता (Biodiversity) को बचा सकते हैं और कई प्रजातियों को विलुप्त होने से रोक सकते हैं।
फ्रंटियर्स इन साइंस पत्रिका में प्रकाशित इस अध्ययन के सह लेखक एंडी ली के मुताबिक संरक्षित क्षेत्रों में सबसे पहले उन स्थानों को चिह्नित किया गया है, जिन्हें तत्काल संरक्षण की आवश्यकता है। एक अन्य लेखकर प्रोफेसर कार्लोस पेरेस नेक हा, ज्यादातर देशों के पास संरक्षण की कोई ठोस रणनीति नहीं है। 30 फीसदी भूमि का लक्ष्य लेकर चलने वाले देशों के पास अभी यह योजना नहीं है कि इतने बड़े हिस्से को कैसे बचाया जाए।
अध्ययन में प्रस्तावित संरक्षण कार्यक्रम के अनुसार इस योजना से 16 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को बचाया जा सकेगा, जो अमरीका के आकार का लगभग पांचवां हिस्सा है। इतने क्षेत्रफल मेें फैले विश्व के 16, 825 स्थलों पर मौजूद दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों का निवास है। प्रस्तावित क्षेत्र में तीन चौथाई स्थल उष्ण कटिबंधीय वन हैं, क्योंकि विश्व की सर्वाधिक जैव विविधता वाला क्षेत्र यही है। इस क्षेत्र में सर्वाधित हिस्सा रूस का है, जबकि अमरीका के पास महज 0.6 फीसदी हिस्सा है।