जिले की डेयरी, चिकन शॉप और पोल्ट्री फार्म का होगा पंजीयन

बर्ड फ्लू सहित अन्य संक्रमण के दौरान रोकथाम पर मिलेगी सहूलियत, व्यापारियों व पालकों की बैठक में विभाग करेगा अपील

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 20 Jan 2021, 11:38 AM IST

अनूपपुर। जिले में पॉल्ट्री फार्म से सम्बंधित अन्य व्यवसाय व डेयरी संचालन जैसे कारोबार पर अब पशु पालन विभाग अपनी निगरानी बनाने की रणनीति में जुटा है। ताकि व्यवसाय से जुड़े पालक, व्यवसायी सहित उनमें पलने वाले जीवों व सामग्रियों की समय पर जांच पड़ताल कर महामारी से बचाया जा सके। यह रणनीति विभाग द्वारा वर्तमान में बर्ड फ्लू के बढ़ते प्रभाव पर तैयार की गई है। जिसमें कमर्शियल रूप में संचालित जिले के डेयरी, चिकन शॉप और पॉल्ट्री फार्म संचालकों को अपने व्यवसाय का पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। ताकि समय समय पर ऐसे पालकों व व्यवसासियों के दुकानों पर विभागीय टीम जांच पड़ताल के लिए आसानी से पहुंच सके और उनके लिए शासकीय स्तर पर आने वाली योजनाओं से अवगत करा सके। इसके लिए विभाग द्वारा पंजीयन शुल्क के रूप में ५०० रूपए निर्धारित की गई है। बर्ड फ्लू नोडल अधिकारी व वीईओ जैतहरी डॉ. वायसी दीक्षित ने बताया कि जिले में वर्तमान में मुर्गी पालन व्यवसाय से लगभग 10 हजार से अधिक पशुपालक प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। जिसमें कॉमर्शियल एवं डोमेस्टिक पोल्ट्री फार्मो की साप्ताहिक एवं रिटेल सेलर सहित डेयरी प्रॉड्क्टस से जुड़े पालक है। लेकिन वर्तमान में ऐसे पालक विभागीय स्तर पर पंजीकृत नहीं है। जिसके कारण विभाग को संक्रमण के दौरान दुकानदारों, डेयरी फार्म और पॉल्ट्री फार्म संचालकों की वास्तविक जानकारी नहीं मिल पाती है। वहीं प्रकृतिक में लगातार आ रहे बदलाव और उनमें पक्षियों के माध्यम से फैलने वाली संक्रमण बीमारी(बर्ड फ्लू) की चपेट में आने वाले पालतू पक्षियों की समय पर जांच पड़ताल नहीं हो पाता। इससे संक्रमण अंजाने में महामारी का रूप ले लेता है। लेकिन पालकों व व्यवसासियों द्वारा पंजीयन कराने पर विभाग सम्बंधित पालकों की नियमित दुकानों की जांच पड़ताल व सुझाव देकर अंजाने में फैलने वाली संक्रमण बीमारी से उन्हें व उनके व्यवसाय को सुरक्षित रखने का प्रयास करेगी।
बॉक्स: पंजीयन से शासन को राजस्व, व्यवसायियों को मिलेगी सुरक्षा
विभाग का मानना है कि कामर्शियल और डोमेस्टिक स्तर पालकों व व्यवसासियों द्वारा किए जाने वाले पंजीयन से सम्बंधित पालक विभाग में पंजीकृत हो जाएंगे। पंजीयन में ५०० रूपए की फीस से जहां सरकार को राजस्व प्राप्त होगी, वहीं व्यवसासियों को विभाग की ओर से लगातार मुर्गियों के स्वास्थ्य सम्बंधित जांच, सफाई के लिए सलाह और शासकीय योजनाओं से मिलने वाली लाभ की जानकारी दी जा सकेगी। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही व्यवसायियों की बैठक लेकर उन्हें जानकारी देने के साथ पंजीयन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
बॉक्स: अबतक १९ पक्षियों की मौत
जिले में अबतक १९ पक्षियों की मौत का मामला सामने आया है। जिसमें कौआ ७, तीतर १, कबूतर ६, बत्तख १, तोता ३, मैना १ है। इनमें भेजे गए पांच सैम्पल प्रति प्रजाति एक सैम्पल में बर्ड फ्लू जैसे संक्रमण की पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं आई है।
वर्सन:
पंजीयन के लिए जल्द ही कार्य आरम्भ किया जाएगा। इससे पूर्व व्यवसायियों की बैठक आयोजित की गई है। सम्भव है कि बीमा सम्बंधित प्रस्ताव भी रखी जाएगी।
डॉ. वायसी दीक्षित, नोडल अधिकारी व वीईओ जैतहरी
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Rajan Kumar Gupta Desk
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