अधिकारियों को नहीं स्वच्छता की परवाह: कचरा संग्रहण वाहनों का हुआ ब्रेक डाउन, घरों से नहीं उठे सात दिनों से कचरा

अधिकारियों को नहीं स्वच्छता की परवाह: कचरा संग्रहण वाहनों का हुआ ब्रेक डाउन, घरों से नहीं उठे सात दिनों से कचरा

By: shivmangal singh

Published: 19 Jan 2019, 08:00 AM IST

भुगतान के अभाव में कंपनियों ने सुधार से बनाई दूरी, एक वाहन के भरोसे ५ हजार से अधिक आवास
अनूपपुर। मध्यप्रदेश स्वच्छता अभियान २०१८ के सर्वेक्षण में टॉप १० सम्मान से सम्मानित अनूपपुर नगरपालिका की सफाई में अब अधिकारियों को स्वच्छता की परवाह नहीं रही। नगरपालिका क्षेत्र के १५ वार्डो में बने ५५०० मकानों से पिछले एक सप्ताह से कचरा का उठाव नहीं हुआ है। घरों में जमा कचरा को वाहनों में जमा करने की आस लिए नगरवासियों को सप्ताह से अधिक दिन गुजर गए। लेकिन नगरपालिका में कचरा संग्रहण के लिए आवंटित ४ वाहनों का कहीं अता पता नहीं दिख रहा है। जिसके कारण नगरवासियों ने अब अपना कचरा आसपास के नालियों व सडक़ों के किनारे फेंकना आरम्भ कर दिया है। नगरवासियों का कहना है कि कचरा रखे-रखे घरो में सड़ांध आने लगी थी। लेकिन कचरा संग्रहण वाहन दरवाजे तक नहीं पहुंचा है। जिसमें अब संक्रमण का खतरा भांपते हुए आखिरकार कचरे को नालियों या सडक़ों पर फेंकना पड़ा। बताया जाता है कि नगरपालिका के लिए वर्ष २०१५-१६ के दौरान कचरा संग्रहण के लिए ४.४० लाख की लगात से खरीदी गई ४ वाहनों का ब्रेक डाउन हो गया है। नगरपालिका अनूपपुर में वर्तमान में चार वाहनें कचरा संग्रहण के साथ साथ दो ट्रैक्टर वाहनों का भी उपयोग कचरा संग्रहण में किया जाता है। इसमें ट्रैक्टरों के माध्यम से से सब्जी मंडी सहित नालियों की सफाई ेस निकले कचरा को उठाने का कार्य किया जाता है। जबकि कचरा संग्रहण वाली छोटी चार वाहनों का उपयोग विभिन्न १५ वार्ड के घरों से कचरा संग्रहण का कार्य किया जाता है। इससे जहां नगर के बाजार क्षेत्र की सडक़ तो साफ दिखती है, लेकिन वार्डो की गलियां व नालियां कचरे से अटी पड़ी है। नगरपालिका सूत्रों के अनुसार चार छोटी वाहनों में एक मात्र वाहन का उपयोग किया जा रहा है। शेष तीन वाहनें खराब पड़ी है। सूत्रों के अनुसार नगरीय प्रशासन द्वारा पूर्व में कराए गए कार्यो के समय पर कंपनी को भुगतान नहीं होने के कारण अब कंपनी ने भी सुधार से इंकार करते हुए दूरी बना ली है। इनमें एक वाहन कंपनी में सुधार के बाद भुगतान के अभाव में पड़ी है। जबकि दो अन्य वाहनें नगरपालिका परिसर में खड़ी है। विदित हो कि २५ दिसम्बर २०१५ में नगरपालिका में कचरा संग्रहण की व्यवस्था को अपनाते हुए प्रतिमाह ८० हजार रूपए की ठेकेदारी पर सफाई व्यवस्था आरम्भ की गई थी। जिसमें कचरा संग्रहण वाहनों से नगर के समस्त १५ वार्डो से कचरा संग्रहण का कार्य किया गया। इनमें बीच-बीच में खराबी बनती रही। लेकिन अन्य वाहनों के माध्यम से सफाई का कार्य जारी रखा गया। लेकिन जनवरी माह के दूसरे सप्ताह से तीन वाहनो के ब्रेक डाउन होने के कारण नगर की सफाई व्यवस्था चौपट हो गया है।
बॉक्स: सफाई की कोरी मॉनीटरिंग
भले ही नगर में स्वच्छता के लिए बैनर-पोस्टर लगाकर सफाई की अपील की गई है। लेकिन उसकी वास्तविकताओं की मॉनीटरिंग के लिए कभी कोई अधिकारी वार्डो के निरीक्षण में नहीं उतरा है। नपा सफाई अधिकारी मुख्य मार्ग की सफाई के बाद वार्डो का कभी निरीक्षण नहीं करते। आलम यह है कि वार्डो की नालियां गंदगी से अटी पड़ी है। जगह जगह कचरे का ढेर बना लगा है। जबकि नाली सफाई के लिए १५ कर्मचारी तथा वार्डो की सफाई में ६५ कर्मचारियों की ड्यटी लगाई गई है। बावजूद नगरपालिका अनूपपुर स्वच्छता अभियान के प्रदेश टॉप टेन के सम्मान से बिल्कुल उल्टा नजर आता है।
वर्सन:
वाहनें सीज कर गई है। चालकों की जानकारी के बाद वाहनों को सुधार के लिए भेजा गया है। एकाध दिनों में कचरा संग्रहण में लग जाएंगे। नालियों की सफाई के लिए निर्देशित करता हूं।
ऋषि सिंघई, डिप्टी कलेक्टर अनूपपुर।

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