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भगवान राम के लिए सोने की जरी से बुने जा रहे परिधान, पुणे सहित इन पांच जगहों पर हो रहा निर्माण

locationअयोध्याPublished: Dec 11, 2023 04:10:39 pm

Submitted by:

Upendra Singh

श्रीरामजन्म भूमि में निर्माणाधीन दिव्य मंदिर जिस प्रकार से तकनीक और सुंदरता की दृष्टि से खास होगा। उसी तरह से विराजमान रामलला के परिधान (वस्त्र) भी खास होंगे। इसका निर्माण महाराष्ट्र के पुणे शहर सहित पांच स्थानों पर शुरू हो गया है।

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प्राण प्रतिष्ठा तिथि की घोषणा के बाद राम मंदिर की विशेषताओं को जन सामान्य तक पहुंचाने के अभियान के अन्तर्गत निर्माणाधीन भवन की तस्वीरें साझा की जा रही है। इसी कड़ी में चार तस्वीरें रविवार साझा की गई है।
प्रवेश द्वार की झांक दिखाई दे रही है
इन तस्वीरों में नागर शैली की स्थापत्य कला प्रदर्शित करते मंदिर के मंडपों की नयनाभिराम तस्वीरों के साथ गूढ़ी मंडप के नीचे फर्श पर इन-ले वर्क नक्काशी सिंहद्वार की भव्यता दर्शाती तस्वीरें हैं। सिंहद्वार के अंदर की तस्वीर में ठीक सामने परकोटे के निर्माणाधीन प्रवेश द्वार की झांकी दिखाई दे रही है।
मंडप के छत की नक्काशी दर्शाई गई है
एक तस्वीर में नृत्य मंडप के छत की नक्काशी दर्शाई गई है। दूसरे में मध्य में भूतल के आर्च दीवारों के साथ फर्श पर चल रहे इन-ले नक्काशी को दर्शाया गया है। मंडप के छत, आर्च दीवारों के ठीक ऊपर अलग-अलग भित्तिचित्रो को दर्शाया गया है। तीर्थ क्षेत्र कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि ने हिन्दुस्तान को बताया कि रामलला के लिए सुंदर परिधानों का निर्माण पांच अलग-अलग स्थानों पर हो रहा है। इन्हीं से पुणे में दस दिसम्बर से अभियान के तहत सैकड़ों बुनकरों के द्वारा मूंगा रेशम, स्वर्ण जरी से बुने परिधान निर्माण का शुरू हुआ है।
22 दिसंबर तक चलेगा अभियान
अभियान 22 दिसम्बर तक चलेगा। बुनकरों के बनाए परिधानों में सर्वश्रेष्ठ परिधान तीर्थ क्षेत्र रामलला के लिए निर्धारित मूल्य पर प्राप्त करेगा। रामलला को असम के खास उत्पाद मूंगा रेशम और सोने की जरी का संयोजन कर परिधानों यानी वस्‍त्र को धारण कराया जाएगा। इसके लिए श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ने हेरिटेज हैंडविविंग रिवाईवल चेरिटेबल ट्रस्ट से अनुबंध किया है। कहा जाता है कि मूंगा सिल्क जितना पुराना होगा उसकी चमक उतनी ही बढ़ती जाएगी। शास्त्रीय दृष्टि से ऊन अथवा रेशम को सर्वाधिक शुद्ध माना गया है। धार्मिक अनुष्ठानों में मौसम के लिहाज से ऊनी व रेशमी वस्त्रत्तें अथवा आसन के प्रयोग का प्रचलन प्राचीन काल से होता रहा है।

धर्म पथ पर सूर्य स्तम्भों से दमकेगी रामनगरी
श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य, दिव्य राममंदिर लगभग तैयार है। 22 जनवरी को रामलला के प्राण प्रतिष्ठा से पहले रामनगरी का शृंगार हो रहा है। श्रद्धालुओं के स्वागत में रामनगरी का हर पथ रोशनी से जगमगाया जा रहा है। अयोध्या धाम में नवनिर्मित धर्म के पथ पर लग रहे सूर्य स्तम्भ श्रीराम जन्मभूमि के दर्शनार्थियों को आकर्षित करेंगे।
श्रीराम स्तंभ भी शोभा बढाएंगे
दो दर्जन से अधिक जगहों पर बनाये जा रहे श्रीराम स्तम्भ भी शोभा बढ़ाएंगे। सूर्य स्तम्भ का निर्माण करा रही महाराष्ट्र की सन सिटी इनोवेशन कंपनी के आर्किटेक्ट सचिन कहते हैं कि धर्मपथ पर करीब नौ मीटर ऊंचे दोनों पटरियों पर 20-20 सूर्य स्तंभ लगाए जा रहे हैं। स्तंभ पर लगने वाली लाइट रात में भी सूर्य के प्रकाश जैसा अनुभव कराने वाली होगी। यह कार्य इसी माह पूरा कराने का प्रयास है।

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