बांसवाड़ा : जीजीटीयू की पीएचडी एंट्रेंस परीक्षा का परिणाम घोषित, 43 प्रतिशत परीक्षार्थी हुए पास

जीजीटीयू: 1456 ने दी थी परीक्षा, वरीयता से मिलेगा प्रवेश

By: Ashish vajpayee

Published: 09 Feb 2018, 11:03 PM IST

बांसवाड़ा. गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय की ओर से पहली बार आयोजित पीएचडी प्रवेश परीक्षा परिणाम शुक्रवार अपराह्न जारी कर दिया गया। परीक्षा में1456 अभ्यर्थी शामिल हुए, जिनमें से 712 (43 प्रतिशत) परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। नेट, स्लेट, एमफिल व जेआरएफ योग्यताधारियों को परीक्षा से छूट दी गई थी। अब उत्तीर्ण अभ्यर्थी के कक्षा 12वीं के 10 प्रतिशत, स्नातक के 20 प्रतिशत, स्नातकोत्तर के 40 प्रतिशत, नेट/सेट/ एमफिल 10 प्रतिशत, विवि के क्षेत्र अधिकार के जिलों के अभ्यर्थियों को 10 प्रतिशत तथा फेलोशिप अभ्यर्थी को भी 10 प्रतिशत अंक जोड़ते हुए मेरिट तैयार की जाएगी। इस मेरिट के अनुसार पीएचडी के लिए अभ्यर्थियों का पंजीयन होगा। उल्लेखनीय है कि विवि की ओर से 20 विषयों में पीएचडी करवाई जाएगी। एक सीट विवि के क्षेत्राधिकार वाले बांसवाड़ा, डंूगरपुर एवं प्रतापगढ़ जिले के एसटी के अभ्यर्थी के लिए आरक्षित रहेगी।

300 सीटें 1500 दावेदार

पीएचडी के लिए विवि की ओर से करीब 300 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। 712 विद्यार्थी एंट्रेंस एक्जाम पास हुए हैं और करीब 800 अभ्यर्थियों को एंट्रेंस एग्जाम से छूट मिली थी। इस प्रकार कुल 1500 से अधिक अभ्यर्थी दावेदारी में हैं।

श्रेणीवार उत्त्तीर्ण

एसटी 295
एससी 84
ओबीसी 153
सामान्य 180

प्रदेश के 162 निजी कॉलेजों की एनओसी पर संकट

बांसवाड़ा. प्रदेश में संचालित162 निजी महाविद्यालयों को सत्र 2018-19 के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र पर संकट मंडरा रहा है। ऑन लाइन आवेदन के बाद लॉक नहीं करने तथा हार्ड कॉपी नोडल अधिकारी को जमा नहीं कराने से ऐसे हालात बने हैं। इसके चलते आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा ने एक बार फिर कॉलेज संचालकों को चेताते हुए 17 फरवरी तक यह कार्य पूरा करने का समय दिया है। इस सूची में बांसवाड़ा के घाटोल से एक तथा डंूगरपुर जिले के चार महाविद्यालय शामिल हैं।

आयुक्त ने निजी कॉलेज के सचिव ,संचालक मण्डल एवं प्राचार्य के नाम जारी पत्र में लिखा है कि तय अवधि तक कार्य पूर्ण नहीं करने पर संबंधित महाविद्यालय के ऑनलाइन आवेदन को निरस्त करते हुए वर्ष 2018-19 के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष ऐसे ही हालात बनते हैं, जिसके चलते अनापत्ति प्रमाण पत्र समय पर जारी नहीं हो पाते हैं। इस पर आयुक्तालय कॉलेज शिक्षा की ओर से तिथिवार पूरी प्रक्रिया तय की गई है, जिससे समय पर प्रवेश प्रक्रिया व अन्य कार्य पूर हो सकें, लेकिन कॉलेजों की यह ढिलाई आयुक्तालय की मंशा पर पानी फेर रही है।

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