
Engineers day...रेगिस्तान में इंजीनियरिंग के 3 बेमिसाल स्तंभ
इंजीनियरिंग..थार के रेगिस्तान में तीन इबारतें लिख रही है। तीनों ही बेमिसाल है। विश्व स्तर पर थार को यह सौगात जहां नाम दे रही है वहीं आर्थिक उन्नति और विकास की गति को भी पंख लग रहे है। प्रदेश का मेगा प्रोजेक्ट रिफाइनरी अब दिन-रात की इंजीनियरिंग की मेहनत से तैयार हो रही है। तेल के खजाने में भूगर्भ से अथाह खजाने का अधिकतम दोहन करने की अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकें देश में बॉम्बे हाई के बराबर बाड़मेर को खड़ा करने की ओर अग्रसर है तो इधर लिग्नाइट आधारित थर्मल पॉवर प्लांट भी कोयले से बिजली उत्पादित कर बिजली संकट में खड़े राज्य को उबारने में अहमियत रख रहा है।
साकार हो रहा रिफाइनरी का सपना
प्रदेश का मेगा प्रोजेक्ट रिफाइनरी इंजीनियरिंग की बड़ी मिसाल है। सैकड़ोंं इंजीनियर्स इसे साकार रूप देने में दिन-रात जुटे है। 16 जनवरी 2018 को रिफाइनरी का कार्य शुभारंभ किया गया लेकिन इसके तीन महीने बाद काम शुरू हुआ । 2019 में कोरोना ने झटका दे दिया। रिफाइनरी कार्य 2022 के अक्टूबर तक सरकार पूरा करने की मंशा रखती थी, लेकिन इसको अब जून 2023 तक का समय तो दिया गया है । कार्य की गति दर्शाती है कि अभी भी यह दूर की कौड़ी है। पचपदरा रिफाइनरी की लागत 43129 करोड़ आंकी गई थी, वर्ष 2022 में महंगाई बढऩे से इसको अब 75000 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाया गया। राजस्थान रिफाइनरी खास यह है कि यहां पर रिफाइनरी और पेट्रो केमिकल कॉम्प्लेक्स एक साथ बन रहे हैं। देश की पहली बीएस 6 मानकों वाली परियोजना के अलावा वेस्ट पेटकोक से 270 मेगावाट बिजली उत्पादन भी यहां पर होगा। रोजगार का एक बड़े प्रोजेक्ट के रूप में इसे देखा जा रहा है।
सबसे बड़ा ऑयल फील्ड
इंजीनियरिंग कार्य क्षेत्र की थार में सबसे बड़ी खोज देखा जाए तो यहां का ऑयल फील्ड है। थार में ऑयल उत्पादन अपने 14 वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यहां पिछले 13 सालों से अलग-अलग ऑयल फील्ड्स से 66 करोड़ बैरल से अधिक कू्रड का उत्पादन हो चुका है। यह निरंतरता जारी है और इसे बढ़ाने के प्रयास भी जोरों पर है। साल 2004 में यहां पर तेल की खोज उस साल की सबसे बड़ी तकनीकी वैश्विक खोज के नाम पर दर्ज है। सबसे पहले यहां पर 29 अगस्त 2009 को पहली बार तेज मिलने के बाद से केवल मंगला ऑयल फील्ड से अब तक 49 करोड़ से अधिक का तेल उत्पादन किया जा चुका है। केयर्न ऑयल एंड गैस भारत के घरेलू कच्चे तेल के उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत का योगदान देता है। कंपनी के राजस्थान ब्लॉक से आने वाले अधिकांश उत्पादन में मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या शामिल हैं।
कोयला दे रहा उजाला
जेएसडब्ल्यू एनर्जी लिमिटेड का संयंत्र थार रेगिस्तान में स्थित है। स्थानीय मौसम की चुनौतियों, अत्यधिक गर्मी और ठंडे तापमान, रेत के तूफान के बावजूद संयंत्र सुचारू रूप से चलता रहता है। यह भारत का पहला बिजली संयंत्र है। इसमें इंदिरा गांधी नहर से पानी के स्रोत के लिए 185 किलोमीटर की एक समर्पित पाइप लाइन है। संयंत्र प्रमुख वीरेश देवरामानी बताते हैं कि बाड़मेर संयंत्र में 1080 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने के लिए आठ 135 मेगावाट इकाइयां शामिल हैं। संयंत्र सीएफबीसी तकनीक पर आधारित है, जो निम्न-श्रेणी के लिग्नाइट(कोयला) ईंधन का उपयोग करता है। जिसमें सल्फर और नमी का स्तर अधिक होता है। पर्यावरण अनुकूल को लेकर विशेषताओं से युक्त थर्मल पॉवर प्लांट में बॉयलर में कोयला के जलने से तापीय ऊर्जा उत्पन्न होती है। जिसे विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। संयंत्र को कुशल तरीके से संचालित किया जाता है। रचनात्मकता ही संसाधनों का अनुकूलन करने का एकमात्र तरीका है
Published on:
15 Sept 2022 08:36 am
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