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प्रदेश की ‘ सियासी राजनीति’ में अटकी कॉलेज छात्रों के ‘एग्जाम की गाइड लाइन

स्नातक तृतीय वर्ष के छात्रों को राज्य सरकार परीक्षा की गाइडलाइन का इंतजार तो इधर यूजीसी ने कहा सितम्बर तक करवा सकते परीक्षा - छात्रों का सवाल - यदि सरकार एक दम फैसला लेगी तो कैसे होगी तैयारी

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प्रदेश की ‘ सियासी राजनीति’ में अटके कॉलेज छात्रों के ‘एग्जाम’

प्रदेश की ‘ सियासी राजनीति’ में अटके कॉलेज छात्रों के ‘एग्जाम’


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बाड़मेर. प्रदेश भर में पिछले एक सप्ताह से सियासी गरमागहमी चल रही है तो दूसरी ओर लाखों विद्यार्थी स्नातक तृतीय वर्ष की परीक्षा को लेकर सरकार के रुख का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने अंतिम वर्ष के छात्रों को प्रमोट करने को लेकर आदेश जारी किए तो दूसरी ओर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शैक्षिक संस्थाओं में यूजी और पीजी की फाइनल ईयर, फाइनल सेमेस्टर की परीक्षाएं सितंबर अंत तक आयोजित कराने का निर्देश दे दिए हैं। इस गाइडलाइन के बाद अब फिर से विश्वविद्यालय को राज्य सरकार की ओर से नए आदेश का इंतजार कर रहे हैं। नए आदेश के आने तक राजस्थान के विश्वविद्यालय ने 10 जुलाई से शुरू होने वाली अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के टाइम टेबल को फिलहाल निरस्त कर दिया गया। वही छात्रों का कहना है कि लॉकडाउन में किराए के कमर छोड़ गांव चल गए थे। एेसे में सरकार का फैसला आने पर वे दुबारा शहर आएंगे और तैयारी करेंगे। समय रहते निर्णय नहीं हुआ तो छात्र तैयारी कैसे कर पाएंगे।

कोरोना संक्रमण के कारण राज्य सरकार ने लिया था फैसला -
लॉकडाउन खुलने के बाद कोविड-19 के मामले और तेजी से बढ़ रहे हैं, जिस कारण राज्य सरकारें , विद्यार्थी और संस्थान परीक्षाएं करवाने के हक में नहीं है। ऐसी हालत में राज्य सरकार ने परीक्षा नहीं करवाने का फैसला लेते हुए कहा कि परीक्षाएं करवाने से न सिर्फ विद्यार्थियों की जिंदगी दोस्त, परिवार और कॉलेज स्टाफ को कोरोना संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। इससे बेहतर है कि परीक्षा को रद्द कर दिया जाए। इसके बाद सरकार ने छात्रों का प्रमोट करने का फैसला लिया, लेकिन यूजीसी ने परीक्षा करवाने की गाइडलाइन निकाली है। एेसे में विश्वविद्यालय प्रशासन करे तो क्या यह स्थिति बनी हुई है।

छात्र असमंजस में-
एक तरफ प्रदेश मे सियासी सरगर्मिया गर्म है तो दूसरे तरफ छात्र परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति में है। एग्जाम के सम्बंध में स्पष्ठ गाइडलाइन नही होने से कॉलेज के छात्र घर बैठे है। वे कॉलेज की किताबें पढ़ें या प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की किताबें। विद्यार्थियों के अनुसार वे जैसे ही कॉम्पिटिशन की तैयारी करते हैं वैसे ही सरकार की एग्जाम की गाइडलाइन आने के बाद फिर से बदलाव कर देती है।

कॉम्पिटिशन की तैयारी करें या कॉलेज की -
ग्रेजुएशन के अंतिम साल के बाद कई रास्ते खुल जाते हैं। ऐसे में अभी अंतिम साल की परीक्षा अटकी होने से भविष्य को लेकर चिंता है। समझ नही आ रहा कि ये कॉलेज के किताबें
पढ़ें या कॉम्पिटिशन की।
- राकेश कुमार , फाइनल ईयर विद्यार्थी

जयपुर से घर आ गया अब दिक्कत-
जयपुर में ग्रेजुएशन कर रहा हूं। लॉकडाउन में तीन माह का किराया देकर सामान घर लेकर आ गया। पता नही परीक्षा कब होगी। अब परीक्षा देने के लिए जयपुर रहने की व्यवस्था में अड़चन आएगी।
- जगमाल चौधरी, विद्यार्थी स्नातक तृतीय वर्ष

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