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शहर- कस्बों में नहीं ‘सरकारी छत’, बिना ‘छात्रावास’ कैसे पढ़ें बालिकाएं

=- जिले में २ लाख 72 हजार बालिकाएं अध्ययनरत, अधिकांश गांवों से

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शहर- कस्बों में नहीं ‘सरकारी छत’, बिना ‘छात्रावास’ कैसे पढ़ें बालिकाएं

शहर- कस्बों में नहीं ‘सरकारी छत’, बिना ‘छात्रावास’ कैसे पढ़ें बालिकाएं

बाड़मेर. गांवों में बालिका विद्यालयों का टोटा और शहर में रहने को सरकारी छत नसीब नहीं होने से भी बालिका शिक्षा प्रभावित हो रही है। जिले में २ लाख ७२ हजार बालिकाएं पढऩे की ललक लिए स्कू ल आ रही है लेकिन आगे की पढ़ाई कर पाएगी या नहीं यह तय नहीं है, क्योंकि बालिका विद्यालयों व छात्रवास का टोटा है।

स्थिति यह है जिले के २१ ब्लॉक में से मात्र ११ में ही बालिका छात्रावास है,जिसमें से अधिकांश में सौ-सौ सीटें ही है। इसके चलते पूरे जिले में बालिका छात्रावास में प्रवेश मात्र तेरह सौ बालिकाओं को ही मिल पाता है।

शेष या तो किराए के मकान में रहे या फिर पढ़ाई छोड़े यह विकल्प है। हालांकि अभी सात छात्रावास और स्वीकृत तो हुए हैं, लेकिन निर्माण कार्य होना बाकी है। उच्च कक्षाओं में बालिकाओं के कंधों से हट रहा बस्ते का बोझ चिंता का विषय है।

वैसे भी जिले में बालिका शिक्षा के प्रति रूझान कम है तो दूसरी ओर बालिका स्कू ल व छात्रावासों की कमी से भी बालिकाएं स्कू ल छोडऩे को मजबूर है। जिले में बालिका स्कू ल मात्र ९२ ही है जबकि छात्रावास की तादाद सिर्फ ११ तक ही सीमित है।

इसके चलते अभिभावक बालिकाओं को पढ़ाई छुड़वा घर के कामकाज में लगा देते हैं। गौरतलब है कि जिले में २ लाख ७२ बालिकाएं अभी पढ़ रही है। दो सौ ग्राम पंचायतों में बारहवीं कक्षा की पढ़ाई तक नहीं है इस पर बालिकाएं शहर या बड़े कस्बों की ओर रुख करती है, लेकिन यहां भी बालिका छात्रावास नहीं होने पर दिक्कत आती है। परिजन से दूर होने पर परिवार वाले बालिकाओं को सरकारी छात्रावास में रखना चाहते हैं लेकिन कम छात्रावास होने से उन्हें किराए के कमरे लेकर बच्चियों को पढ़ाना पड़ता है। एेसे में असुरक्षा की भावना पर अभिभावक बालिकाओं को दूर भेजने से परहेज रख रहे हैं।

यहां है छात्रावास सुविधा- जिले में बालोतरा, बाड़मेर, बायतु व चौहटन में केजीबी-४ छात्रावास है, जहां नवीं से बारहवीं की बालिकाओं को प्रवेश मिलता है। यहां प्रति छात्रावास सौ-सौ सीट है जिसमें दस अतिरिक्त सीटें बढ़ाई जा सकती है। वहीं हरसाणी व महिलावास में छठीं से बारहवीं की दो- दो सौ बालिकाओं को प्रवेश मिलता है। निम्बाणियों की ढाणी, साता, सियाणी, रामसीन मूंगड़ा के छात्रावास में सौ-सौ बालिकाएं प्रवेश ले सकती हैं।वहीं आवासीय छात्रावास नोखडा छह से आठवीं की सौ बालिकाओं को प्रवेश देने की सुविधा है।

सात नए छात्रावास स्वीकृत पर शुरू नहीं- जिले में मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत वर्ष २०२०-२१ के तहत पाटोदी, शिव और धनाऊ में व २०२१-२२ में सिणधरी,धोरीमन्ना, सिणधरी व कल्याणपुर ब्लॉक में छात्रावास की स्वीकृति दी गई है। यहां अभी तक छात्रावास आरम्भ नहीं हुए हैं।

माध्यमिक शिक्षा का एक छात्रावास- जिले में माध्यमिक शिक्षा के तहत एक छात्रावास का संचालन हो रहा है। यह छात्रावास अंतरीदेवी बाउमावि के मार्फत जिला मुख्यालय पर संचालित हो रहा है।

११ छात्रावास संचालित, सात की स्वीकृति- जिले में ११ बालिका छात्रावास संचालित है, जहां बालिकाएं रह रही हैं। सात छात्रवास की और स्वीकृति आ चुकी है। कुछ जगह कम नामांकन होने पर वीसी के माध्यम से तय नामांकन तक बालिकाओं को प्रवेश देने के निर्देश दिए हैं।-जयप्रकाश व्यास, सहायक जिला परियोजना समन्वयक समग्र शिक्षा बाड़मेर

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