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साध्वी प्रेम बाईसा के वो आखिरी 30 सेकंड… ‘मुझे जीते जी न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद… बोलते हुए छलक गईं पिता की आंखें

साध्वी प्रेम बाईसा की हुई संदिग्ध मौत के बाद अब उनके पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं। सोशल मीडिया पर लगातार तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। मामला पूरी तरह भ्रामक हो गया है।

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Sadhvi Prem Baisa death

साध्वी प्रेम बाईसा (फाइल फोटो)

बाड़मेर। जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक हुई मौत ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है। मामूली जुकाम के इलाज के लिए लगाए गए एक इंजेक्शन के बाद महज 30 सेकंड में उनकी तबीयत बिगड़ने और फिर मौत हो जाने के दावे ने इस मामले को रहस्यमय बना दिया है। इस घटना से न सिर्फ परिवार और अनुयायी सदमे में हैं, बल्कि संत समाज में भी गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है। हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर उस इंजेक्शन के बाद ऐसा क्या हुआ, जिसने एक स्वस्थ साध्वी की जान ले ली। अब साध्वी की मौत के मामले पर बड़े स्तर पर जांच की मांग उठ रही है।

परिजनों के अनुसार 28 जनवरी को साध्वी प्रेम बाईसा को हल्का जुकाम और गले में खराश थी। उनके पिता विरमनाथ का कहना है कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ थी और किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं थी। लगातार धार्मिक कार्यक्रमों के कारण वह व्यस्त जरूर रहती थी, लेकिन स्वास्थ्य को लेकर कोई चिंता नहीं थी। जुकाम को मामूली समझते हुए साध्वी ने अस्पताल जाने के बजाय घर पर ही डॉक्टर को बुलाने की बात कही। इसके बाद एक कंपाउंडर आया और प्राथमिक जांच के बाद इंजेक्शन लगाया गया।

30 सेकंड के भीतर हालत हुई खराब

परिवार का दावा है कि इंजेक्शन लगने के करीब 30 सेकंड के भीतर ही साध्वी की हालत अचानक बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत, बेचैनी और कमजोरी इतनी तेजी से बढ़ी कि किसी को संभलने का मौका ही नहीं मिला। घबराए परिजन तुरंत उन्हें जोधपुर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। यहीं से कई सवाल खड़े हो गए। क्या यह इंजेक्शन से एलर्जी का मामला था, क्या बिना जरूरी जांच के दवा दी गई या फिर यह गंभीर मेडिकल लापरवाही का परिणाम है।

साध्वी ने आखिरी समय क्या कहा?

साध्वी प्रेम बाईसा के पिता विरमनाथ ने मौत के वो आखिरी 30 सेकेंड याद करते हुए रो पड़े। उन्होंने बताया कि बेटी ने जीवन के आखिरी समय में कहा कि 'मुझे जीते जी न्याय नहीं मिला, लेकिन मरने के बाद न्याय जरूर मिलना चाहिए। अब इसपर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आखिर साध्वी किस न्याय की बात कर रहीं थी। दरअसल, पिता के साथ गले मिलते हुए वीडियो वायरल होने के बाद साध्वी ने अग्नि परीक्षा की बात कही थी। इसको लेकर मुकदमे भी दर्ज हुए हैं। साध्वी की हुई मौत का मामला अब पूरी तरह से मिस्ट्री बन चुका है। सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार है।

पूरा गांव शोक में डूबा

साध्वी प्रेम बाईसा का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव परेऊ (बालोतरा) पहुंचा, तो पूरा गांव शोक में डूब गया। हजारों श्रद्धालु, संत और ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। उनके द्वारा स्थापित ‘शिव शक्ति धाम’ आश्रम में राजकीय और धार्मिक विधि-विधान के साथ उन्हें समाधि दी गई। अंतिम विदाई के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। मेवाड़ महामंडलेश्वर ईश्वरीय नंदगिरी सहित कई बड़े संतों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उन्हें सनातन धर्म की बेटी बताया।

साधु-संतों में नाराजगी

इस मामले में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और आपत्तिजनक टिप्पणियों ने परिवार और संत समाज की पीड़ा और बढ़ा दी है। साधु-संतों का कहना है कि बिना तथ्यों के की जा रही बयानबाजी से न सिर्फ दिवंगत साध्वी की छवि धूमिल हो रही है, बल्कि समाज में भ्रम भी फैल रहा है। संत समाज ने एक सुर में निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और सोशल मीडिया पर अनर्गल लिखने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाने की मांग की है।

जांच की मांग

परिजन भी किसी पर सीधा आरोप लगाने से बचते हुए सिर्फ सच सामने आने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यह मेडिकल लापरवाही का मामला है, तो जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और की जान यूं न जाए। फिलहाल साध्वी प्रेम बाईसा की मौत कई सवाल छोड़ गई है, जिनके जवाब का इंतजार अब पूरे समाज को है। उनका वीडियो वायरल होने के बाद साल 2022 और साल 2025 में मुकदमा दर्ज हो चुका है।

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