जाम्भाणी हरि कथा में बोले डॉ.आचार्य, मानव तन पाने के लिए देवता भी लालायित रहते है

जाम्भाणी हरि कथा में बोले  डॉ.आचार्य, मानव तन पाने के लिए देवता भी लालायित रहते है

Omprakash Prakash Mali | Publish: May, 18 2018 10:49:25 AM (IST) Barmer, Rajasthan, India

श्री जगत गुरु जंभेश्वर मंदिर सदराम की बेरी में जाम्भाणी हरि कथा के पंचम दिन

सेङवा. तीन चीजें मिलनी जीव के लिए अति दुर्लभ कही गई है मनुष्यत्वम मुमुक्षत्वं और महापुरुषों की संगति। उक्त विचार महंत स्वामी हरीदास महाराज के सानिध्य मे आचार्य संत डॉ गोवर्धन राम शिक्षा शास्त्री ने जाम्भाणी हरि कथा के पंचम दिन की कथा करते हुए श्री जगत गुरु जंभेश्वर मंदिर सदराम की बेरी में प्रकट किये। आचार्य श्री ने कहा कि देव दुर्लभ तन जिसे मिला निश्चित रुप से वे सौभाग्यशाली है । जिन्होंने मानव तन का महत्व नहीं समझा लोग स्वगज़् की अपेक्षा रखते हैं उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि स्वगज़् में रहने वाले देवता दिन.रात परमात्मा से एक ही प्राथज़्ना करते हैं कि प्रभु कृपा करके एक बार मानव तन हमें प्रदान करें। उन्होंने मनुष्य जीवन का महत्व समझाते हुए कहा कि यह कमज़्योनी है इसमें नुतन कर्म करने की क्षमता है । अभीष्ट मंजिल की प्राप्ति संभव है अत: आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें तदनुरूप यात्रा करने का संकल्प लें यात्रा प्रारंभ करें निश्चित रूप से मंजिल मिलेगी जीवन सफल होगा।आचार्य श्री ने कहा कि जिन्होंने मनुष्य शरीर के महत्व को नहीं समझा वे लोग केवल जीवन के व्यवहारिक पक्ष के बारे में सोचते रहते है उसकि सिद्धि ही उनका परम लक्ष्य बन गया है और इसी में जीवन को झौक देते है मानव जीवन का लक्ष्य और महत्व जिस दिन समझ में आएगा उस दिन जीवन का चाहे व्यवहार पक्ष हो अथवा अध्यात्म पक्ष दोनों को साधने की सोच जगेगी साथ ही समझ पाओगे कि गोण पक्ष कौन सा है और प्रधान पक्ष कौन सा है व्यवहार में कुशलता और परमाथज़् में प्रसंता हो ऐसी तैयारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सदगुरुदेव भगवान श्री जांभोजी ने अपनी वेदमयिवाणी में जीवन के दोनो पक्षो को साधने मे अभीष्ट भूमिका आचरण की कही है लेकिन दुनिया के लोग आचार.विचार का महत्व न समझ पाने के कारण केवल दुनिया की मनकीतिज़् के पाने के लिए स्वेच्छाचारी बन जाते हैं एवं मयादज़. अमयादज़ का भेद नहीं रहता है। हम कहां बैठे हैं यह स्थान कौन सा है या किस वस्तु का उपयोग होना चाहिए किसका उपयोग न करे व्यक्ति अहंकार में अंधा हुआ पदए धन के मदान्ध में भूल बैठता है और मयादज़ओं का अतिक्रमण कर देता है उसे यहां तक भी याद नहीं रहता है की एक मयादज़ की एक रेखा राजा रावण ने लांघी थी उसका परिणाम कितना भयानक था। अत: मिला जो मौका है इसका सदुपयोग करें जैसा कि भगवान शंकराचायज़् ने अति दुलज़्भ जिस मानव जीवन को कहां है उसका सदुपयोग करें।

जाम्भाणी प्रतिभाखोज परीक्षा का हुआ आयोजन
श्री जम्भेश्वर सेवा संस्थान सदराम की बेरी के बैनरतले जाम्भाणी प्रतिभाखोज परीक्षा 2018 सदराम की बेरी में आयोजित की गई। सदराम की बेरी परीक्षा संयोजक हरजेश थोरी ने बताया कि इस परीक्षा में कुल 60 परीक्षाथीज़् पंजीकृत हुए जिसमे सभी उपस्थित रहे।ओर इस परीक्षा में प्रथमए द्वितीयए तृतीय स्थान पर आने वालों को नकद व प्रशांति पत्र दिया जाएगा।जिसमे बालकिशन सियाकए अशोक खिलेरीए भजनलाल खिलेरीए बालाराम खिलेरी ने परीक्षा आयोजन में महती भूमिका निभाई।

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