
UPSC Success Story: पहली, दूसरी और तीसरी बार तक सफलता नहीं मिली तो क्या हुआ, अडिग बने रहे। सफलता मंगलवार को उनके कदम चूम गई। जब यूपीएससी का परिणाम आया तो भाडखा गांव के मोहन जाखड़ 53वीं रैंक पर चयनित हुए। चौहटन के अक्षय डोसी 75वीं रैंक पर हैं। बालोतरा के विजय राघव गोयल ने 229वीं रैंक हासिल की है। समदड़ी के पूरण बुनकर 885वीं रैंक प्राप्त करते हुए आइएएस बने हैं।
सरहदी चौहटन कस्बे के लाडले अक्षय डोसी ने यूपीएससी प्रतियोगी परीक्षा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। चौहटन के अक्षय का 75वीं रैंक में फाइनल चयन होने पर समूचे सरहदी इलाके में खुशी की लहर छा गई। अक्षय पुत्र महेश कुमार डोसी को 2016 में खड़गपुर आइआइटी पासआउट होने के बाद कई कंपनियों से उन्हें बड़े पैकेज के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने आईएएस की तैयारी करने के लिए दिल्ली की राह चुनी। अक्षय ने दिल्ली में जीतो संस्था (जैन इंटरनेशनल टेलेंट ऑर्गेनाइजेशन) में रहकर आईएएस की कोचिंग एवं तैयारी शुरू की। आईएएस के लिए यह छठा प्रयास था।
प्रतिभावान अक्षय का आरएएस 2023 में 165वीं रैंक में चयन हुआ था, आरएएस प्रशिक्षण के लिए कॉल का इंतजार था। इससे पहले आइएएस में फाइनल सलेक्शन का परिणाम आ गया। अक्षय का छोटा भाई शुभम जयपुर में आरएएस की तैयारी कर रहा है, पिता महेश कुमार डोसी एलआइसी में एमडीआरटी अभिकर्ता हैं।
दसवीं तक चौहटन में बाल मंदिर विद्यालय में की। ग्यारहवीं एवं बारहवीं कोटा में कोचिंग सेंटर में की, जहां आईआईटी की तैयारी की। वर्ष 2011 में आईआईटी में प्रवेश के बाद 2016 में पास आउट हुआ, यहां उसने निजी कंपनियों की ओर से मिले ऑफर को छोड़कर यूपीएससी की तैयारियों में जुट गया था।
बाड़मेर-जैसलमेर रोड़ के भाडखा कस्बे के मोहन जाखड़ ने 12वीं में आइआइटी खड़गपुर में 3580वीं रैंक से चयनित होकर ही बता दिया था कि उसका लक्ष्य आगे बढ़ने का है। आईसीएसआर में एग्रीकल्चर ऑफिसर का प्रशिक्षण ले रहे मोहन से पत्रिका की बातचीत के अंश।
पारीवारिक पृष्ठभूमि- पिता चंदाराम और मां रामूदेवी है। हमारा परिवार साधारण किसान परिवार है। माता-पिता का सपना था कि पढूं और आगे बढूं। हमेशा प्रेरित किया। भाई कांस्टेबल है,उन्होंने पूरी मदद की।
प्रेरणा- माता पिता और परिजन जिन्होंने हमेशा प्रेरित किया। कभी भी यह परेशानी आई तो उन्होंने कहा पढ़ाई करें, पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं है। वही प्रेरणा मुझे आगे बढ़ाती रही।
मूलमंत्र- सेल्फ स्टडी कीजिए। आजकल ऑनलाइन पर बहुत कुछ मदद मिलती है। इसके बाद सात से आठ घंटे तक की नियमित पढ़ाई करता रहा हूं। यह आदत दसवीं-बारहवीं से ही है। जब लक्ष्य बड़ा तय किया तो फिर मेहनत उसी हिसाब से थी। आईआईटी खड़गपुर की कामयाबी ने मुझे काफी प्रोत्साहित किया।
संदेश- असफलताओं से घबराएं नहीं। मेरा चौथी बार में चयन हुआ है। हर बार नए सिरे से तैयारी पर ध्यान दिया। अपनी कमियों को समझा और दूर किया।
प्रारंभिक शिक्षा- गांव में ही भवानी निकेतन में पढ़ा और फिर बाड़मेेर में मयूर नोबल्स एकेडमी में 9 से 12 वीं तक रहा। यहां के बाद आईआईटी में चयनित हो गया।
भारतीय सिविल सर्विसेज परीक्षा में बालोतरा के विजय राघव गोयल ने कामयाबी हासिल की। सामान्य श्रेणी में पूरे देश में 229वीं रैंक प्राप्त करने वाले विजय ने चौथे प्रयास में यह सफलता प्राप्त की है।
आईआईटी पासआउट विजय राघव गोयल शरूआत से ही मेधावी छात्र रहे हैं। आईआईटी के बाद अमरीका की एक कंपनी में प्लेसमेंट हुआ। कुछ वर्ष वहां पर नौकरी करने के बाद स्वदेश में सेवा करने की भावना को लेकर वह भारत लौटे। प्रथम प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की। दो प्रयासों में साक्षात्कार तक पहुंचा, लेकिन सफल नहीं हो पाए। घर पर ही सेल्फ स्टडी करने वाले विजय राघव ने बताया कि वह प्रतिदिन 7 से 8 घंटे पढ़ाई करते। इस बार कामयाबी होने को लेकर पूरा विश्वास था। टैक्सटाइल कारोबारी पिता जयप्रकाश गोयल, माता सीता गृहिणी, चार्टर्ड अकाउंट बहन निशा गोयल, भाई पवन राघव उनको हमेशा कामयाब होने के लिए प्रेरित करते थे। परिणाम पक्ष में नहीं रहने पर भी सकारात्मक सोच रख पढ़ाई करने की बात कहते। माता-पिता,गुरुजन को सफलता का श्रेय देते हुए बताया कि कामयाब अधिकारी बन देश सेवा करने की इच्छा रखता है। कमजोर, पिछड़े वर्ग की सेवा करना उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि मेहनत करके कुछ भी प्राप्त कर सकते हैं।
समदड़ी निवासी पूरण प्रकाश बुनकर ने आइएएस बनने का सपना बुुना और साकार किया। इसके लिए आईआईटी करने के बाद कंपनियों की ओर से आ रहे पैकेज को नहीं चुना और खुद की मेहनत पर भरोसा किया। चयनित होने के बाद बुनकर कहते हैं कि सफलता के लिए मूलमंत्र मेहनत है। उनका 885 वीं रैंक पर चयन हुआ है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि- पिता गोपाराम मेघवाल पूर्व विधायक है और मां सीतादेवी गृहणी। समदड़ी में ही निवास है। एक भाई दिल्ली में साथ में है। परिवार में पढ़ाई का वातावरण शुरू से ही है।
प्रेरणा- माता-पिता ने हमेशा पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। पिता ने हमेशा साथ दिया और बड़े सपने देखने के लिए कहा।
मूलमंत्र- किसी भी फील्ड में हो पूरी मेहनत करें। अपना लक्ष्य तय कर अपनों को बताएं। फिर, लगन से जुट जाएं। जहां पर भी परेशानी हों बात करें, लेकिन परेशान न हों। मेहनत का कोई विकल्प नहीं।
संदेश- छोटे गांव में पढ़कर भी आप बड़े सपने देख सकते हैं। पढ़ाई के लिए अपने आप को हर उम्र में तैयार करें। जब भी अवसर हों पढ़े और जिज्ञासाओं के उत्तर तलाशें।
प्रारंभिक शिक्षा- समदड़ी गांव में ही पढ़ाई की। बीटेक के बाद यूपीएससी का लक्ष्य बनाया। पांच साल से दिल्ली में रहकर तैयारी की। तीसरे प्रयास में चयन हुआ है।
Updated on:
17 Apr 2024 03:37 pm
Published on:
17 Apr 2024 03:30 pm
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