
बैतूल/भौंरा। पिछले लगभग डेढ़ महीने से भौंरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दहशत का कारण बने दो वर्षीय नर तेंदुआ को आखिरकार सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) की टीम ने सोमवार शाम ट्रेंकुलाइज कर पकड़ लिया। रामपुर-भतोड़ी डिपो के पास स्थित चिरमाटेकरी की पहाड़ी पर दिनभर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद यह सफलता मिली। तेंदुआ की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक विनोद वर्मा ने बताया कि यह कार्रवाई क्षेत्र संचालक राखी नंदा के मार्गदर्शन में तथा भौंरा रेंज के रेंजर ब्रजेन्द्र तिवारी के नेतृत्व में की गई। इस अभियान में एसटीआर, भौंरा वन विभाग, एसडीआरएफ तथा भोपाल और रातापानी से आए वन्यजीव विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम शामिल रही। कुल मिलाकर 50 से अधिक वनकर्मी और चार प्रशिक्षित हाथी लगातार अभियान में जुटे रहे।
सुबह से शाम तक चला सर्च ऑपरेशन
रविवार रात से ही वन विभाग का अमला तेंदुआ की सर्चिंग में जुट गया था। सोमवार सुबह करीब 8 बजे कॉलर आईडी के माध्यम से तेंदुआ की लोकेशन मिली। इसके बाद हाथियों की मदद से उसे खदेडकऱ पहाड़ी की ओर ले जाया गया, लेकिन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र के कारण तेंदुआ बार-बार नजरों से ओझल हो जाता था। हाथियों का पहाड़ी पर ऊपर न जा पाना भी अभियान में बड़ी चुनौती बना। इस दौरान तेंदुआ ने एक बछड़े का शिकार भी कर लिया और शिकार को जंगल में छोडकऱ फिर गायब हो गया। लगातार असफल प्रयासों के बाद वन अमले ने रणनीति बदली। तेंदुआ द्वारा किए गए शिकार को पहाड़ी से नीचे खुले मैदान में लाकर रखा गया और डॉक्टरों की टीम ने वहीं घात लगाकर तेंदुआ के लौटने का इंतजार किया।
अपने ही शिकार के जाल में फंसा तेंदुआ
कुछ घंटों के इंतजार के बाद तेंदुआ अपने शिकार को लेने वापस लौटा। जैसे ही वह शिकार के पास पहुंचा, डॉक्टरों की टीम ने ट्रेंकुलाइज गन से सटीक शॉट लेकर उसे बेहोश कर दिया। इसके बाद मौके पर ही तेंदुआ को सुरक्षित रूप से काबू में कर लिया गया। शाम करीब 5 बजे तेंदुआ को पिंजरे में डालकर वन विहार भोपाल भेजने की तैयारी की गई।
पहले भी दो बार पकड़ा जा चुका है यही तेंदुआ
सहायक संचालक विनोद वर्मा ने बताया कि यह वही तेंदुआ है, जिसे पहले भी दो बार पकड़ा जा चुका है। पहली बार पिपरिया के पास जंगल से पकडकऱ इसके गले में कॉलर आईडी लगाई गई थी और बाद में जंगल में छोड़ा गया। दूसरी बार सुखतवा के हिरण चापड़ा क्षेत्र से पकडकऱ पुन: जंगल में छोड़ा गया था। बावजूद इसके, यह तेंदुआ बार-बार ग्रामीण क्षेत्रों की ओर आ जाता था और कॉलर आईडी होने के बावजूद पहाड़ी इलाके के कारण इसकी लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो रहा था।
बालक पर हमले के बाद बढ़ा आक्रोश
उल्लेखनीय है कि 16 जनवरी को भौंराढाना क्षेत्र में तेंदुआ ने एक चार वर्षीय बालक आर्यन पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। बालक को पहले बैतूल में इलाज दिया गया, इसके बाद स्थानीय विधायक गंगा सज्जन सिंह उइके के प्रयास से कलेक्टर बैतूल द्वारा एम्बुलेंस से एम्स भोपाल भेजा गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया था और वन विभाग पर दबाव बढ़ गया था।
वन विहार भोपाल रवाना, ग्रामीणों ने ली राहत की सांस
तेंदुआ के ट्रेंकुलाइज होने के बाद रातापानी अभयारण्य, वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डॉक्टरों की टीम ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया।सहायक संचालक विनोद वर्मा ने बताया कि पकड़े गए तेंदुआ को वन विहार भोपाल भेजा गया है, जहां उसकी निगरानी और आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, रेस्क्यू में शामिल हाथियों के दल को भी वापस भेज दिया गया है और जंगल में लगाए गए पिंजरे हटा लिए गए हैं। लगातार 50 दिनों तक भय के साए में जी रहे ग्रामीणों ने तेंदुआ पकड़े जाने के बाद राहत की सांस ली है। वन विभाग का कहना है कि अब क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह सामान्य है।
Published on:
19 Jan 2026 08:39 pm
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