
Dipanshu's parents and brother at home
बैतूल। यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद भारत के हजारों छात्र यूक्रेन में फंसे हुए हैं। इनमें से एक छात्र बैतूल जिले का दीपांशु विश्वकर्मा भी है जो यूक्रेन के विनिशिया में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है। दीपांशु 27 फरवरी को भारत वापस आने वाला था, लेकिन युद्ध शुरू होने की वजह से सारी उड़ाने रद्द कर दी गई। जिसके बाद दीपांशु अपने सैकड़ों साथियों के साथ बंकर में रह रहा है। वहीं दूसरी तरफ बैतूल में दीपांशु के परिजन उसके सुरक्षित वापस आने की दुआएं कर रहे हैं। दीपांशु विगत चार सालों से यूक्रेन में रहकर पढ़ाई कर रहा है। दीपांशु के दो और भाई है। इनमें बड़ा भाई कुशल और मंझला मिथलेश है। जो माता-पिता के साथ पाढऱ में रहता है।
परिवार बेटे के सकुशल आने की बाट जोह रहा
बैतूल के पीसझोडी गांव के सरकारी स्कूल में पदस्थ गणित के शिक्षक उमेश विश्वकर्मा का सबसे छोटा बेटा दीपांशु पिछले चार साल से यूक्रेन के विनिशिया में नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है । यूक्रेन की राजधानी कीव से विनिशिया की दूरी 400 किलोमीटर है। यूक्रेन में युद्ध की आहट के बाद दीपांशु ने भारत वापस लौटने के लिए 27 फरवरी की फ्लाइट बुक कराई थी जो युद्ध शुरू होते ही रद्द हो गई । अब दीपांशु का पूरा परिवार अपने बेटे के सकुशल वापस आने की बाट जोह रहा है।
परिजनों से रोजाना दीपांशु की हो रही बात
यूक्रेन में जारी युद्ध के बीच दीपांशु रोजाना अपने परिजनों को वहां के हालात बता रहा है जिससे परिवार काफी तनाव में है। दीपांशु ने परिजनों को बताया कि उनकी यूनिवर्सिटी ने समय रहते उन्हें हालात से अवगत नहीं कराया जिससे अब वो बुरी तरह फंस चुके हैं । यूके्रन सरकार फिलहाल उनकी सुरक्षा को लेकर सतर्क है, लेकिन उनकी वतन वापसी को लेकर कुछ तय नजऱ नहीं आ रहा है । दीपांशु की मां गायत्री विश्वकर्मा का कहना था कि बेटा बंकर में सो रहा हो तो माँ को नींद कैसे आएगी। हर पल सिर्फ दीपांशु के वापस आने को लेकर वो चिंतित हैं और स्थानीय प्रशासन से लेकर प्रदेश सरकार सहित भारतीय दूतावास में संपर्क कर रही हैं । दीपांशु के साथ भारत के और भी कई छात्र हैं जिन्हें फिलहाल साफ तौर पर कह दिया गया है कि उन्हें वतन वापस लौटने के लिए थोड़ा इंतज़ार करना होगा ।
Updated on:
26 Feb 2022 09:42 pm
Published on:
26 Feb 2022 09:41 pm

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