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बीच सडक़ खड़े बिजली के पोल, फिर भी शुरू हुआ निर्माण

-7.89 करोड़ की लागत से बन रही सडक़ निर्माण पर उठे सवाल, पोल शिफ्टिंग के बिना सडक़ निर्माण से दोबारा खर्च और अव्यवस्था की आशंका बैतूल। लिंक रोड से गाड़ाघाट तक 7.89 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित सडक़ निर्माण कार्य भले ही शुरू हो गया हो, लेकिन यह निर्माण आम लोगों के लिए राहत […]

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-7.89 करोड़ की लागत से बन रही सडक़ निर्माण पर उठे सवाल, पोल शिफ्टिंग के बिना सडक़ निर्माण से दोबारा खर्च और अव्यवस्था की आशंका

बैतूल। लिंक रोड से गाड़ाघाट तक 7.89 करोड़ रुपए की लागत से प्रस्तावित सडक़ निर्माण कार्य भले ही शुरू हो गया हो, लेकिन यह निर्माण आम लोगों के लिए राहत कम और चिंता का कारण बन गया है, क्योंकि नियमों और तकनीकी प्रक्रिया को दरकिनार कर बिना बिजली के पोल शिफ्ट किए ही सडक़ बनाई जा रही है। नतीजा यह है कि इस मार्ग पर 100 से अधिक बिजली के पोल कहीं आंशिक रूप से तो कहीं पूरी तरह सडक़ के बीच खड़े नजर आ रहे हैं। यह स्थिति न केवल यातायात की दृष्टि से खतरनाक है, बल्कि भविष्य में दोबारा खर्च और अव्यवस्था का कारण भी बन सकती है।
बिना पोल शिफ्टिंग जल्दबाजी में निर्माण शुरू
जानकारी के अनुसार जनप्रतिनिधियों द्वारा भूमिपूजन किए जाने के बाद विभागीय दबाव में निर्माण कार्य को जल्दबाजी में शुरू कर दिया गया। पोल शिफ्टिंग की प्रक्रिया पूरी किए बिना सडक़ का निर्माण आरंभ कर दिया गया, ताकि परियोजना में देरी न हो। हालांकि, इसका खामियाजा आने वाले दिनों में आम नागरिकों को भुगतना पड़ सकता है। पीडब्ल्यूडी विभाग का तर्क है कि सडक़ को फिलहाल एक साइड से बनाया जा रहा है और बाद में पोल शिफ्टिंग कर दूसरी लेन का काम किया जाएगा, लेकिन तकनीकी जानकार इसे अव्यवहारिक और खर्च बढ़ाने वाला कदम मान रहे हैं।
ड्रेनेज सिस्टम का काम भी अधर में लटका
पोल शिफ्ट नहीं होने का सीधा असर ड्रेनेज सिस्टम पर भी पड़ा है। सडक़ निर्माण के साथ-साथ ड्रेनेज लाइन डालने का काम शुरू होना था, लेकिन पोल बीच में होने के कारण ड्रेनेज का कार्य अटका हुआ है। इससे साफ है कि आने वाले समय में बनी-बनाई सडक़ को दोबारा खोदना पड़ेगा। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होगी, बल्कि शासन के खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। बताया गया है कि सर्वे में करीब 101 बिजली के पोल चिन्हित किए गए थे, लेकिन शिफ्टिंग के लिए जो टेंडर लगाए गए हैं, वे कम पोलों के लिए हैं। पोल शिफ्टिंग में लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। सवाल यह उठता है कि यदि शुरुआत में ही पोल शिफ्टिंग करा ली जाती, तो असुविधा से बचा जा सकता था।
व्हाइट टॉपिंग में भी पोल शिफ्टिंग की वजह से हुई देरी
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की लापरवाही सामने आई हो। इससे पहले व्हाइट टॉपिंग सडक़ निर्माण के दौरान भी पोल शिफ्टिंग नहीं होने के कारण कोठीबाजार क्षेत्र में करीब दो महीने तक काम ठप रहा था। बाद में पोल हटाने के बाद दोबारा निर्माण शुरू किया गया, जिससे समय और पैसा दोनों की बर्बादी हुई। अब वही स्थिति लिंक रोड से गाड़ाघाट सडक़ परियोजना में दोहराई जा रही है।स्थानीय निवासी राधेश्याम सोनी का कहना है कि सडक़ बनने के बाद पोल शिफ्टिंग और ड्रेनेज के लिए सडक़ को फिर से खोदा जाएगा। इसके बाद मरम्मत के लिए नए टेंडर लगेंगे, यानी एक ही काम पर दोहरा खर्च होगा।
2.70 किमी बनना है सडक़
कारगिल चौक से गाड़ाघाट तक 2.70 किलोमीटर लंबी सडक़ बनाई जानी है। इसमें कारगिल चौक से बच्चा जेल चौक तक सडक़ की चौड़ाई 10 मीटर होगी। कुल 2140 मीटर हिस्से में सीसी रोड और 560 मीटर हिस्से में डामरीकृत सडक़ बनाई जाएगी। टीएनसीपी के अनुसार सडक़ की स्वीकृत चौड़ाई 45 फीट है, लेकिन नपाई के दौरान कई स्थानों पर चौड़ाई कम पाई गई। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तो की गई, लेकिन बुनियादी तकनीकी प्रक्रिया को नजरअंदाज कर दिया गया।
इनका कहना
-सडक़ निर्माण में देरी के कारण काम पहले शुरू कराया गया है। सडक़ एक किनारे से बनाई जा रही है। पोल शिफ्टिंग के लिए टेंडर किए गए हैं। पोल शिफ्ट होने के बाद दूसरी लेन का काम किया जाएगा। इसमें किसी तरह की समस्या नहीं है।

  • डी. परमार, एसडीओ पीडब्ल्यूडी बैतूल।
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