
बैतूल. आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा कि मध्यप्रदेश में आज भी ऐसा गांव है, जहां के लोग बरसों पुरानी जिदंगी जी रहे हैं, जहां आज के समय में शहर के लोग एसी में बैठकर दुनिया के सभी काम चंद मिनटों में अंगुलियों से ऑनलाइन निपटा देते हैं, वहीं इन ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती है, यहां बिजली नहीं होने के कारण ग्रामीण महिलाएं अनाज भी घर पर ही घट्टियों से पीसती है, इस गांव को देखकर ऐसा लगता है जैसे हम 100 साल पुराने दौर में आ गए हैं।
ग्रामीणों ने आज तक अपने गांव में बिजली नहीं देखी है। गांव में खंभा है न तार। ग्रामीणों को आज भी हाथ घट्टियों से अनाज पीसना पड़ रहा है। ग्रामीणों को बिजली से संबंधित हर काम के लिए परेशान होना पड़ता है। हम बात कर रहे हैं भीमपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत काबरा के ग्राम जांगूढाना की।
भीमपुर ब्लॉक के जांगूढाना में लगभग 40 मकान हैं और यहां पर अधिकांश आदिवासी समाज के लोग निवास करते हैं। गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहा है। सडक़, पानी और बिजली गांव में आज तक नहीं पहुंची है। ग्राम पंचायत के सरपंच झुम्मकलाल बारस्कर ने बताया आजादी के इतने वर्ष बाद भी इस गांव में बिजली नहीं पहुंची है। देश का विकास इस गांव में नजर नहीं आता है। ग्रामीणों को बिजली से संबंधित सभी कामों के लिए परेशान होना पड़ता है। पानी के लिए गांव में व्यवस्था नहीं है। गांव से एक किमी दूर से हैंडपंप से पानी लाना पड़ता है। गांव में स्कूल तक नहीं है। गांव में समस्या को लेकर नेताओं से लेकर अधिकारियों तक गुहार लगा चुके हैं, लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हुआ। खेड़ीसांवलीगढ़ निवासी मनोहर अग्रवाल ने बताया वे गांव में कभी-कभी जाते हैं। उन्होंने बताया ग्रामीण आज भी गांव में हाथ घट्टियों से अनाज पीसने को मजबूर हैं।
यहां भी यही हाल
यही हाल ग्राम पंचायत पातरी के रैयतवाड़ी के हैं। सरपंच अर्जुन धुर्वे ने बताया लगभग १०-12 वर्ष पहले गांव में बिजली के लिए सोलर पैनल लगाए थे, सभी बंद है। गांव में बिजली नहीं है। शिकायतों के बाद भी समस्या का हल नहीं निकला।
ग्रामीणों को नहीं मिल रही मूलभूत सुविधा
ग्रामीण राम सिंह और हरीश उजोने ने बताया कि वर्षों से ग्रामीण सडक़, बिजली, पानी, स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहे हैं। सुविधाओं की कमी के कारण ग्रामीणों को खासा परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीण कन्हैया ने बताया बिजली और स्कूल नहीं होने से छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। बच्चों को पढ़ाई करने के लिए चार किमी दूर दूसरे गांव में जाना पड़ता है।
Published on:
29 Dec 2022 10:28 am

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