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मजदूर दिवस आज : मजदूरी बढ़ी, घर बैठे रोजगार भी मिल रहा

मनरेगा से सुधर रहे हालात, पलायन हुआ कम

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मनरेगा से सुधर रहे हालात, पलायन हुआ कम

मनरेगा से सुधर रहे हालात, पलायन हुआ कम

बैतूल. कोरोना काल के बाद मजदूरों के प्रति सरकार का नजरिया बदला है। मजदूरों को घर छोडक़र अन्य राज्यों में काम करने के लिए नहीं जाना पड़े इसके लिए सरकार ने मनरेगा के तहत जिले में ही ढेरों रोजगार के अवसर खोल दिए हैं। इस साल मनरेगा में मजदूरी को भी बढ़ा दिया गया है। अब मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को 204 रुपए प्रति दिन के हिसाब से मजदूरी का भुगतान होगा। जबकि पहले यह मजदूरी दर 193 रुपए प्रति दिन हुआ करती थी।
गांव-गांव खोले गए रोजगार : रोजगार के अभाव में गांव से कोई पलायन नहीं करे और मजदूरों को सतत रोजगार उपलब्ध होता रहे इसके लिए मनरेगा में 1100 काम शुरू किए गए हैं। साथ ही 104 अमृत सरोवरों का निर्माण भी कराया जा रहा है। यह पूरा काम मजदूरों के माध्यम से ही कराया जा रहा है। इसमें सरकार को फायदे हो रहे हैं। पहला तो मजदूरों को घर बैठे रोजगार मिल पा रहा है और दूसरा जलसंरक्षण को लेकर बेहतर तरीके से काम हो रहा है। मनरेगा में केंद्र एवं राज्य सरकार ने अपने-अपने अंशदान में वृद्धि करते हुए मजदूरों के मजदूरी की दरों में भी बढ़ोत्तरी कर दी है। अब मजदूरों को २०४ रुपए प्रति दिन के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
48 हजार से अधिक मजदूरों को रोजगार
मनरेगा के तहत इन दिनों जिले में जलसंरक्षण को लेकर एक हजार से अधिक काम खोले गए हैं। इनमें तालाब, स्टाप डैम, चेक डैम आदि के जीर्णोद्धार के काम शामिल है। इन कार्यों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से ही जॉब कार्डधारी मजदूरों को काम पर लगाया गया है। वर्तमान में जिले में ४८ हजार से अधिक मजदूर काम पर लगे हुए हैं। खासकर महिला मजदूरों की संख्या काफी ज्यादा बताई जाती है। जॉब कार्ड के आधार पर मनरेगा में सप्ताह के सप्ताह मजदूरी का भुगतान कर दिया जाता है।
भूमि स्पर्श मुद्रा में मिली भगवान बुद्ध की प्रतिमा
बैतूल. जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर स्थित देवगांव में भूमि स्पर्श मुद्रा में भगवान बुद्ध की प्रतिमा मिली है। जयवंती हॉक्सर शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय बैतूल के प्रोफेसर डॉ. सुखदेव डोंगरे ने बताया कि भगवान बुद्ध की भूमि स्पर्श मुद्रा में खंडित अवस्था में गांव के बीच में रास्ते पर रखी है। जिसे कुछ ग्रामीणजन भैरोनाथ की मूर्ति बताते हैं एवं कुछ ग्रामीणों को यह पता ही नहीं है कि मूर्ति किसकी है। आमला से 8 किमी दूरी पर बसे देवगांव में ही हनुमान मंदिर है, देवगांव में उपस्थित हनुमान मंदिर के बाहर ग्रामीणजनों ने प्राचीन बौद्धकालीन कमल के फूल की शिल्पकलायुक्त आकृति रखी है। हनुमान मंदिर के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे प्राचीन बौद्ध कालीन शिल्पकला युक्त आकृति रखी है। इसमें छोटा बौद्ध स्तूप, कलश, खंडित शिल्पकला जिसमें केवल पैर दिख रहे हैं उसके नीचे बौद्धकालीन कलाकृति है। इसके अलावा खंडित अवस्था में स्त्रीरूपी बुद्ध की मूर्ति मौजूद है। उसी के बाजू में अस्पष्ट देवी की मूर्ति उपलब्ध है। जिसकी पहचान किया जाना संभव नहीं है। इस शोध एवं सर्वेक्षण कार्य में काजली के दुलीचंद खातरकर एवं शिक्षिका भागरती डोंगरे ने किया है।