
इलाहाबाद हाईकोर्ट
मुलताई. अपर सत्र न्यायाधीश कृष्णदास महार ने एक पिता के खिलाफ चार लाख रुपए की वसूली के लिए वसूली वारंट जारी किया है। लगभग 6 महीने पहले अपर सत्र न्यायाधीश मोहन पी तिवारी ने इस पिता को आदेश दिया था कि वह अपनी बेटी के लिए योग्य वर की तलाश करें एवं बेटी को विवाह के लिए चार लाख रुपए की राशि एकमुश्त प्रदान करें। न्यायालय में आवेदिका बेटी द्वारा पिता के विरूद्घ धारा 20-3 सहपठित धारा 3 ख हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम के तहत आवेदन लगाकर स्वंय के विवाह के लिए 7 लाख रुपए मांगे थे, जिस पर न्यायालय द्वारा उक्त आदेश जारी किया था, लेकिन पिता द्वारा छह महीने के बाद भी जब राशि जमा नहीं की गई तो न्यायालय ने अब पिता के खिलाफ वसूली वारंट जारी करते हुए एकपक्षीय कार्रवाई की है। आवेदिका के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि आवेदिका की ओर से उनके द्वारा लगभग 6 महीने पूर्व न्यायाधीश मोहन पी तिवारी के न्यायालय के समक्ष आवेदिका के पिता के खिलाफ धारा 20-3 सहपठित धारा 3 ख हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदिका ने न्यायालय के समक्ष निवेदन किया था कि उसका पिता दूसरी पत्नी एवं बच्चों के साथ सुखमय जीवन व्यतीत कर रहा है, जबकि वह अपनी मां के साथ अलग रह रही है और अभाव में जी रही है। अब उसकी उम्र विवाह योग्य है, ऐसे में उसके पिता से विवाह के लिए उसे 7 लाख रुपए दिलवाएं जाए। अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने पर 31 अगस्त 2017 को न्यायाधीश मोहन पी तिवारी में प्रकरण में सुनवाई करते हुए अनावेदक पिता को आदेश दिए कि वह अपनी बेटी के लिए योग्य वर की तलाश करें एवं बेटी को विवाह के लिए 4 लाख रुपए एकमुश्त प्रदान करें। न्यायालय के आदेश के बाद भी अभी तक युवती के पिता ने उक्त राशि जमा नहीं की थी, जिस पर अपर सत्र. न्यायाधीश कृष्णदास महार द्वारा युवती के पिता के खिलाफ वसूली वारंट जारी करते हुए एकपक्षीय कार्रवाई की है।
Published on:
02 Mar 2018 01:38 pm

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