
राजस्व रिकॉर्ड में 3500 एकड़ खेती की जमीन 2300 सौ किसान, हकीकत में बस गई कॉलोनियां
भिलाई. राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में आज भी नगर पालिक निगम क्षेत्र में ३५०० एकड़ जमीन पर २३०० किसान जमीन पर खेती कर रहे हैं। धान की बंपर पैदावारी कर रहे हैं। सहकारी मर्यादित समिति में बेच भी रहे हैं। हकीकत इसके विपरीत है। शहरीकरण से किसानों की कृषि जमीन छिन गई। कोहका, सुपेला, कुरुद, जुनवानी, खम्हरिया और रिसाली के कृषि जमीन पर बस्ती बस गई है। फिर भी यहां खेती की जमीन होना बताया जा रहा है। सुपेला क्षेत्र में मकान, दुकान, सड़क नाली के अलावा कहीं पर खेती की जमीन नहीं है। फिर भी रिकॉर्ड में दो किसान है। जिनके नाम पर खेती योग्य कृषि जमीन है।
चाहकर भी खेती नहीं कर पा रहे हैं किसान
निगम क्षेत्र में जो खेती की जमीन बची है। उसमें किसान चाहकर भी खेती नहीं कर पा रहे हैं। अवैध प्लॉटिंग की वजह से १-२ एकड़ की कृषि जमीन छोटे-छोटे टुकड़े हो गई। किसी प्लॉट में मकान बन गया है तो किसी में बाउंड्रीवाल की वजह से रास्ता बंद हो गया है। इस वजह से किसानों को खेत तक पहुंचने में दिक्क्कत होती है। यदि कोई किसान किसी तरह से धान की बुआई कर भी लिया तो बारिश में मेड़ पार नहीं होने की वजह से खेत में पानी नहीं ठहरता। पूरी फसल को चट कर जाते हैं। इस वजह से छोटे किसानों ने खेती छोड़ दिया। मध्यम वर्गीय या बड़े किसान जिनका २-३ एकड़ का एक जगह पर प्लॉट है, केवल वही लोग फैंसिंग कर खेती कर रहे हैं।
3500 एकड़ से अधिक थी खेती की जमीन
जुनवानी, खम्हरिया, सुपेला संजय नगर, लक्ष्मी नगर, अयप्पा नगर, फरीद नगर, गांधी कॉलोनी, आर्य नगर, शिक्षक नगर, कृपाल नगर, बजरंगपारा और रिसाली में खेती होती थी। वहां अब बहुमंजिला मकान बन गए हैं। कांक्रीट की सड़क नालियां बन गई है। वाटर रिचार्ज के प्राकृतिक स्रोत बंद हो गया। हरियाली गायब है। आर्य नगर भेलवा तालाब के नीचे देखमुख फार्म हाउस के अलावा कहीं पर खेती नहीं होती।
निगम क्षेत्र में २२२ किसान कर रहे हैं खेती
भिलाई निगम क्षेत्र में करीबन २२२ किसान हैं। जो आज भी खेती करते हैं। सबसे अधिक १५० किसान कुरुद में है। इन किसानों के पास १०० हेक्टेयर से अधिक कृषि जमीन है। ३० किसान कोहका में है। १५० एकड़ जमीन है। २ किसान सुपेला में १० एकड़ से अधिक जमीन है। २२ किसान रिसाली में २२ एकड़ जमीन है। २० किसान खम्हरिया में हैं। जिनका फार्म हाउस है। कांटा तार से घेरा कर खेती करते हैं।
सरकारी मर्यादित समिति में रजिस्टर्ड हैं किसान
कृषक सेवा सहकारी समिति मर्यादित के आंकड़ों में कोहका, सुपेला, कुरुद, जुनवानी, खम्हरिया, जामुल, ढौर, अकलोरडीह में २३०० छोटे, मध्यम और बड़े किसान है। जो सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते हैं। समिति में धान भी बेचते हैं। हकीकत में इतने किसान खेती नहीं करते। सिर्फ नाम के किसान रह गए हैं। अवैध प्लॉटिंग की वजह से उनके नाम पर सड़क, नाली की जमीन बची हुई है।
पटवारी नील कमल सोनी ने बताया कि अवैध प्लॉटिंग की वजह से कृषि जमीन से रिकॉर्ड को दुरुस्त करना मुश्किल होता है। प्लॉट काटने के बाद सड़क, नाली की जमीन बचती है। वह जमीन मालिक के नाम पर रह जाता है। उस जमीन को हम चाहकर भी विलोपित नहीं कर सकते।
Published on:
15 Jun 2019 11:54 pm
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